हल्द्वानी: शिवरात्रि के मौके पर चट्टान पर बने छिद्र को क्यों पार करतीं हैं महिलाएं…

हल्द्वानी: शिवरात्रि के मौके पर चट्टान पर बने छिद्र को क्यों पार करतीं हैं महिलाएं…

हल्द्वानी, अमृत विचार। देवभूमि उत्तराखंड पौराणिक किस्सों कहानियों और लोगों की आस्था से जुड़ा एक क्षेत्र है। ऐसा ही एक क्षेत्र है नैनीताल जिले का मुक्तेश्वर कस्बा, होने को तो मुक्तेश्वर एक छोटा सा कस्बा है मगर भगवान भोलेनाथ का मंदिर और इसके ठीक नीचे चट्टानों का समूह जिसे पहले चौथा जाली और अब चौली …

हल्द्वानी, अमृत विचार। देवभूमि उत्तराखंड पौराणिक किस्सों कहानियों और लोगों की आस्था से जुड़ा एक क्षेत्र है। ऐसा ही एक क्षेत्र है नैनीताल जिले का मुक्तेश्वर कस्बा, होने को तो मुक्तेश्वर एक छोटा सा कस्बा है मगर भगवान भोलेनाथ का मंदिर और इसके ठीक नीचे चट्टानों का समूह जिसे पहले चौथा जाली और अब चौली की जाली के नाम से जाना जाता है यहां आने वाले पर्यटकों का आस्था का केंद्र है।

 

दरअसल इन चट्टानों के समूह में से एक चट्टान में बना छिद्र लोगों में कौतूहल पैदा करता है और इस छिद्र को लेकर तमाम कहानियां और किस्से भी प्रचलित हैं मगर हां इतना जरूर है कि शिवरात्रि के मौके पर इस छिद्र को पार करने के लिए तमाम महिलाएं पंक्ति लगाए खड़ी नजर आती हैं और उन महिलाओं में सबसे ज्यादा तादाद उन महिलाओं की होती है जिन्हें किसी न किसी कारणवश संतान सुख प्राप्त नहीं हो पाता।

,सुरक्षा का कोई इंतजाम न होते हुए भी महिलाएं आस्था से इसे पार कर जाती हैं। लेकिन अब पुलिस सीहत स्थानीय लोगों की देखरेख में महिलाओं को इससे पार करवाया जाता है। प्रचलित धारणा के मुताबिक वे महिलाएं जो संतान उत्पत्ति नहीं कर सकती शिवरात्रि के दिन इस दिन यहां मौजूद चट्टान में बने छिद्र से हो कर गुजरती हैं तो उसे भोले के आशीर्वाद से निश्चित ही संतान की प्राप्ति होती है।

बहरहाल इस छिद्र को लेकर अलग-अलग राय है। स्थानीय निवासी गणेश बोरा, अनुराग पांडेय सहित कुछ लोगों का कहना है कि जब सैम देवता अपने गणों के साथ हिमालय जा रहे थे तो उनके मार्ग में चौली की जाली की चट्टानें आ गयीं उधर शिवजी भी उस वक़्त चट्टान में धूनी रमाये बैठे थे यह देख सैम देवता ने भोलेनाथ से मार्ग देने का आग्रह किया परंतु भोलेनाथ तपस्या में लीन होने के कारण सैम देवता का आग्रह नहीं सुन सके यह देख सैम देवता को क्रोध आ गया और वे आक्रोशित हो गए इस पर भगवान शिव की तपस्या भी भंग हो गयी और उन्होंने अपने त्रिशूल के प्रहार से सैम देवता पर आक्रमण कर दिया और सैम देवता को इस छिद्र से गायब कर दिया जिससे चट्टान पर एक बड़ा छिद्र हो गया। बाद में सैम देवता ने झांकर सैम को अपनी तपस्थली बनाया।

मंदिर निवासी स्वामी सच्चिदानन्द पुरी महाराज (लाल बाबा) पिछले कई वर्षों से यहाँ हैं। शिवरात्रि के दिन को ख़ास दिन बताते हुए बताते हैं वे कहते हैं कि मुक्तेश्वर स्थित चौली की जाली का यह छिद्र अनूठा है और इसमें कई दिव्य शक्तियों का निवास है स्वयं शिवजी यहां बैठ घंटों तपस्या में लीन रहते थे आज भी इन चट्टानों में अलौकिक शक्तियों का वास है।

 

चौली की जाली में इस तरह से पार करती हैं महिलाएं छिद्र को

 

एक दूसरी कहानी भी है कि महाभारत काल में जब पांडव वनागमन पर थे तब भीम अपनी गदा से समय व्यतीत करने के लिए शक्ति प्रदर्शन करते रहते थे जब इन चट्टानों पर उन्होंने कुछ समय व्यतीत किया तो यहाँ भी उन्होंने अपनी शक्ति को परखा इसी वजह से यह गोलाकार छिद्र चट्टान में उभर गया उधर वैज्ञानिक पहलुओं पर जाएं तोअल्मोड़ा कॉलेज के डॉ ललित चन्द्र जोशी के मुताबिक किस्से, कहानियों और जनश्रुतियों को अगर थोड़ा अलग रखें तो वायु अपरदन इस छिद्र का निर्माण प्रबल कारण हो सकता है, क्योंकि इस क्षेत्र में वायु का प्रबल दबाव है.बहरहाल, कहानी जो भी हो पर क्षेत्र मे चौली की जाली का प्राचीन नाम चौथा जाली बताया जाता है।

यह स्थान लोगों की गहन आस्था से जुड़ा है इस छिद्र के पीछे की किवदंतियों, किस्सों,तर्क और कहानियों के पीछे लोगों के अलग-अलग मत हो सकते हैं मगर शिवरात्रि के दिन यहां मौजूद श्रद्धालुओं का सैलाब इस रहस्य की ओर ध्यान जरूर आर्कर्षित करता है। वहीं लोगों में इसके नाम बदले जाने को लेकर भी रोष है और उनका कहना है इस जगह को संग्रहित किए जाना चाहिए और जगह को साफ-स्वच्छ रखना जरूरी है।

मंदिर निवासी स्वामी सच्चिदानन्द पुरी महाराज (लाल बाबा) पिछले कई वर्षों से यहाँ हैं। शिवरात्रि के दिन को ख़ास दिन बताते हुए बताते हैं वे कहते हैं कि मुक्तेश्वर स्थित चौली की जाली का यह छिद्र अनूठा है और इसमें कई दिव्य शक्तियों का निवास है स्वयं शिवजी यहां बैठ घंटों तपस्या में लीन रहते थे आज भी इन चट्टानों में अलौकिक शक्तियों का वास है।