New Year 2022: नए साल में शनि बदलेगा अपनी चाल, साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्त होंगी ये राशियां

शनि की स्थिति यदि शुभ है तो व्यक्ति हर क्षेत्र में प्रगति और उन्नति करता रहता है। उसके जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं होता। बाल और नाखून मजबूत होते हैं। ऐसा व्यक्ति न्यायप्रिय होता है और समाज में उसका मान-सम्मान खूब रहता हैं। अगर किसी पर शनि की नज़र वक्रीय पड़ जाए …
शनि की स्थिति यदि शुभ है तो व्यक्ति हर क्षेत्र में प्रगति और उन्नति करता रहता है। उसके जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं होता। बाल और नाखून मजबूत होते हैं। ऐसा व्यक्ति न्यायप्रिय होता है और समाज में उसका मान-सम्मान खूब रहता हैं। अगर किसी पर शनि की नज़र वक्रीय पड़ जाए तो मकान या मकान का हिस्सा गिर जाता है या क्षतिग्रस्त हो जाता है या मकान बिक जाता है। घर में लड़ाई-झगड़े के कारण परिवार में फूट पड़ जाती है। अगर शनि के प्रकोप से बचना हो तो बुजूर्गों का सम्मान करें।
शनि का प्रभाव किसी भी व्यक्ति पर लंबे समय तक रहता है। क्योंकि ये ग्रह बहुत ही धीमी गति से गोचर करता है। शनि को एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने में करीब ढाई साल का समय लग जाता है। अभी शनि मकर राशि में गोचर कर रहे हैं और 29 अप्रैल 2022 से ये कुंभ राशि में गोचर करने लगेंगे। इस राशि में शनि के प्रवेश करते ही गुरु ग्रह की राशि पर शनि साढ़े साती शुरू हो जाएगी।
आचार्य प्रमोद बताते हैं कि अपने राशि परिवर्तन के कारण किसी को लाभ तो किसी को हानि प्रदान करते है। शनि को ग्रहो में न्यायाधीश का पद प्राप्त है, इसी कारण अपने भ्रमण के क्रम में व्यक्ति के आचरण ,व्यवहार व कर्म के आधार पर फल प्रदान करते हैं, इसी को सामान्य भाषा में शनि की ढईया या साढ़े साती कहा जाता है।
शनि भी देते हैं लाभ
नए साल में शनि किसी को अपने साढ़े साती से मुक्त करेंगे तो किसी को ग्रस्त करेंगे। ऐसा नही है कि शनि की साढ़ेसाती केवल कष्टकारक ही होती है अपितु इनकी साढेसाती राजयोग भी प्रदान करती है। शनि देव के कुम्भ राशि के संचरण से 29 अप्रैल 2022 के बाद धनु राशि वाले साढ़े साती के प्रभाव से मुक्त होंगे तथा मिथुन एवं तुला राशि वाले ढैय्या के प्रभाव से मुक्त हो जाएंगे। मकर राशि के लिए उतरती एवं कुम्भ राशि के लिए मध्य तथा मीन राशि वालों के लिए चढ़ती साढेसाती चलने लगेगी।
इन राशियों की चलेगी ढैया
कर्क एवं वृश्चिक राशि वालों पर सामान्य अढ़ैय्या चलेगी । शनि 17 जुलाई 2022 तक कुम्भ राशि मे मार्गी एवं वक्री गति से संचरण करेंगे। उसके बाद वक्री गति से पुनः मकर राशि में प्रवेश करके वर्तमान स्थिति को प्राप्त करेंगे। जहां 16 जनवरी 2023 तक विद्यमान रहकर अपना प्रभाव स्थापित करेंगे। अर्थात 17 जुलाई 2022 से 16 जनवरी 2023 तक पुनः धनु, मकर और कुंभ राशि के लोग साढ़े साती के प्रभाव में तथा मिथुन एवं तुला राशि वाले ढैया के प्रभाव में रहेंगे।
शनि इन कार्यों का है कारक
सूर्य पुत्र शनि देव एक राशि मे लगभग ढाई वर्ष तक विद्यमान रहकर चराचर जगत को अपने प्रभाव से प्रभावित करेंगे। अपने प्रभाव के कारण शनि का घर परिवर्तन अर्थात गोचरीय परिवर्तन ज्योतिष की दृष्टि में एक बडे परिवर्तन के रूप में देखा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में न्यायधीश का पद प्राप्त कर्म फल प्रदायक शनि देव को आजीविका, सेवक, जनता, तकनीकी कार्य, मशीनरी, अध्ययन, पठन पाठन, कर्म, पूजा पाठ, अध्यात्म, माइन्स, पेट्रोलियम, पाचनतंत्र, हड्डी का रोग एवं निर्माण तथा इंडस्ट्री इत्यादि का कारक ग्रह माना जाता है।
इन राशियों को दिखेगा प्रभाव
कुम्भ राशि के इस परिवर्तन से मीन राशि के सिर, कुम्भ राशि के हृदय एवं मकर राशि के पैर पर विशेष प्रभाव रहेगा । इस प्रकार इनके इस परिवर्तन के प्रभाव से मीन राशि वालों को मानसिक उलझन, आर्थिक तनाव, आय से अधिक व्यय, शुभ कार्यो एवं निर्माण में अनावश्यक अवरोध की स्थिति बनी रह सकती है। कुम्भ राशि वालों के सुखों में व्याधान, भाई बहनों बंधुओं को लेकर कष्ट, माता को कष्ट, घबराहट, संतान को लेकर चिंता, परंतु भाग्य में सकारात्मक परिवर्तन और मकर राशि के लोगों के परिवार में वृद्धि, पेट व पैर की समस्या, वाणी असंयमित आय में व्यवधान उत्पन्न कर सकते है।
शनि के प्रभाव को यूं करें कम
सूर्यास्त के बाद हनुमानजी का पूजन करें। पूजन में सिन्दूर, काली तिल्ली का तेल, इस तेल का दीपक एवं नीले रंग के फूल का प्रयोग करें।सवा-सवा किलो काले चने अलग-अलग तीन बर्तनों में भिगो दें। इसके बाद नहाकर, साफ वस्त्र पहनकर शनिदेव का पूजन करें और चनों को सरसो के तेल में छौंक कर इनका इनका भोग शनिदेव को लगाएं। इसके बाद पहला सवा किलो चना भैंसे को खिला दें. दूसरा सवा किलो चना कुष्ट रोगियों में बांट दें और तीसरा सवा किलो चना अपने ऊपर से उतार कर किसी सुनसान स्थान पर रख आए।
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