रातों रात मंदिर ने खुद ही बदल ली थी मुख्य दरवाजे की दिशा, जानें क्‍या है रहस्य…

रातों रात मंदिर ने खुद ही बदल ली थी मुख्य दरवाजे की दिशा, जानें क्‍या है रहस्य…

एक ऐसा चमत्कारी सूर्य मंदिर जिसका रातों रात मुख्य दरवाजे की दशा बदल गई थी। भगवान सूर्य के इस मंदिर को देवार्क सूर्य मंदिर के नाम से भी लोग जानते हैं। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि जब औरंगजेब देव सूर्य मंदिर को तोड़ने आया था जब लोग मंदिर के बाहर इकट्टा हो …

एक ऐसा चमत्कारी सूर्य मंदिर जिसका रातों रात मुख्य दरवाजे की दशा बदल गई थी। भगवान सूर्य के इस मंदिर को देवार्क सूर्य मंदिर के नाम से भी लोग जानते हैं। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि जब औरंगजेब देव सूर्य मंदिर को तोड़ने आया था जब लोग मंदिर के बाहर इकट्टा हो गए। फिर लोगों ने औरंगजेब से मंदिर तोड़ने को मना किया लेकिन वह नहीं माना। उसने कहा कि यदि देवता का मुख्य द्वार रात भर में पूरब से पश्चिम हो जाए तो वह मंदिर नहीं तोड़ेगा। कहते हैं कि अगली सुबह मंदिर का मुख्य द्वार पश्चिम की ओर हो गया।

विश्वकर्मा ने बनाया था मंदिर
इस सूर्य मंदिर का निर्माण द्वापर युग में हुआ था। कहते हैं कि इस मंदिर को खुद विश्वकर्मा जी ने बनाया था। यही कारण है कि इस मंदिर को देवार्क सूर्य मंदिर के नाम से पुकारा जाता है। साथ ही यह मंदिर देश के प्रसिद्ध तीन सूर्य मंदिरों में से एक है। कोणार्क और लोलार्क सूर्य के बाद इस मंदिर को ही सूर्य मंदिर के तैर पर ख्याति प्राप्त है।

सूर्य की अद्भुत मूर्ति
इस मंदिर में सूर्य देव की त्रिमूर्ति प्रतिमा विराजमान हैं। इसमें सूर्य सात रथों पर सवार हैं। माना जाता है कि सूर्यदेव की ये तीन मूर्तियां सूर्य के उदय, मध्य और अस्ताचल स्वरूप की हैं। इसके अलावा इस मंदिर परिसर में भगवान शिव और माता पार्वती की भी प्रतिमाएं हैं। जो बिलकुल अलग हैं। साथ ही इस मंदिर में भगवान शिव की जांघ पर माता पार्वती को विराजमान हैं।

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