माध्यमिक विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षा से वंचित हो रहे छात्र, तमाम दावों के बाद भी नहीं शुरू हुई पढ़ाई

लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित शासकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कम्प्यूटर विषय का संचालन होता है, इसमें बच्चे हर साल प्रवेश भी लेते हैं, लेकिन ये बच्चे बिना पढ़े ही पास हो जाते हैं। इसकी वजह यह है कि सरकार ने कम्प्यूटर को विषय तो माना है लेकिन शिक्षकों की …
लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित शासकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कम्प्यूटर विषय का संचालन होता है, इसमें बच्चे हर साल प्रवेश भी लेते हैं, लेकिन ये बच्चे बिना पढ़े ही पास हो जाते हैं। इसकी वजह यह है कि सरकार ने कम्प्यूटर को विषय तो माना है लेकिन शिक्षकों की भर्ती नहीं की गयी है, ऐसे में बच्चों को बाहर से पढ़ाई करनी पड़ती है। यह क्रम पिछले करीब आठ सालों से चल रहा है।
इस संबंध में कॉलेजों के प्रधानाचार्य व शिक्षक व विभाग के अधिकारी कुछ खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। वहीं छात्रों का कहना है कि वह कम्प्यूटर विषय की पढ़ाई निजी स्तर से करते हैं। हालांकि विभाग के अधिकारी यह भी मानते हैं कि जब सभी विषयों के शिक्षक नियुक्त हैं तो कम्प्यूटर विषय के भी शिक्षक होने चाहिए तभी पढ़ाई हो सकती है। लेकिन हल कुछ नहीं नहीं निकला है।
2014 के बाद नहीं मिली कम्प्यूटर शिक्षा
इंटर कॉलेजों में कम्प्यूटर शिक्षा छात्रों से कोसों दूर है। 2014 के बाद से छात्रों को कम्प्यूटर विषय के बारे में पढ़ाया ही नहीं गया। जिन कॉलेजों में पढ़ाई होती भी है वहां अन्य विषयों के शिक्षकों का ही योगदान है।
आईसीटी योजना भी नहीं हो सकी बहाल
प्रदेश भर में 2014 तक चली आईसीटी योजना के तहत शासकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षा छात्रों को प्रदान की गई। इसके बाद किसी ने ध्यान नहीं दिया।
बता दें कि आईसीटी योजना प्रदेश में 1 जुलाई 2009 बसपा शासन काल से शुरू हुई थी। संविदा के आधार पर संचालित इस कार्यक्रम की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को 30 जून 2014 तक के लिए मिली थी। योजना के तहत हर विद्यालय में कम्प्यूटर और जनरेटर के साथ अन्य जरूरी उपकरण दिए गए थे। लेकिन इसके बाद से कंपनी का करार आगे नहीं बढ़ाया गया और कम्प्यूटर शिक्षा धड़ाम हो गयी।
शिक्षक व प्रादेशीय मंत्री माध्यमिक शिक्षक संघ डॉ आरपी मिश्रा ने कहा कि कम्प्यूटर आज के समय में अति आवश्यक हो चुका है, सरकार ने इसी को ध्यान में रखते हुए विषय भी माना है, लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद उम्मीद थी कि योगी सरकार कोई उचित कदम उठायेगी, लेकिन कोई निर्णय नहीं हो सका है।