बरेली: 1443 कर्मचारियों की देनदारी का श्रम विभाग में नहीं कोई रिकार्ड

बरेली: 1443 कर्मचारियों की देनदारी का श्रम विभाग में नहीं कोई रिकार्ड

बरेली, अमृत विचार। रबर फैक्ट्री (सिंथेटिक एंड केमिकल्स) के कर्मचारियों की देनदारी को लेकर असमंजस की स्थिति खड़ी हो गयी है। 22 साल से देनदारी मिलने की उम्मीद लगाए कर्मचारियों की देयता के संबंध में श्रम विभाग में कोई भी अभिलेख उपलब्ध नहीं है। रबर फैक्ट्री प्रकरण के नोडल अधिकारी अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व …

बरेली, अमृत विचार। रबर फैक्ट्री (सिंथेटिक एंड केमिकल्स) के कर्मचारियों की देनदारी को लेकर असमंजस की स्थिति खड़ी हो गयी है। 22 साल से देनदारी मिलने की उम्मीद लगाए कर्मचारियों की देयता के संबंध में श्रम विभाग में कोई भी अभिलेख उपलब्ध नहीं है।

रबर फैक्ट्री प्रकरण के नोडल अधिकारी अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को भेजी रिपोर्ट में उप श्रमायुक्त ने बताया है कि उनके पास डाटा नहीं होने की वजह से रबर फैक्ट्री के कर्मचारियों की वास्तविक देयता की स्थिति स्ष्पट किया जाना संभव नहीं है। दी गयी रिपोर्ट में उप श्रमायुक्त अनुपमा गौतम ने बताया कि कर्मचारियों की देनदारी के संबंध में मंत्री रबर फैक्ट्री कर्मचारी संघ बरेली तथा सुपरवाइजर स्टाफ के संबंध में मार्च 2010 तक गणना कर अनुमानित धनराशि रुपया 201.15 करोड़ रुपए की सूचना कार्यालय में उपलब्ध करायी गयी थी। जिसके क्रम में तत्कालीन उप श्रमायुक्त द्वारा 10 दिसंबर 2009 को रिपोर्ट संयुक्त निदेशक उद्योग को प्रेषित की गयी थी।

उपश्रमायुक्त की रिपोर्ट मिलने के बाद जिला प्रशासन और असमंजस में आ गया क्योंकि कर्मचारियों की ओर से कर्मचारी नेता अशोक मिश्रा ने पूर्व में बॉबे हाईकोर्ट में विचाराधीन मामले की सुनवाई के दौरान 270 करोड़ रुपए की देनदारी का क्लेम किया है। उन्होंने इसकी रिपोर्ट मंडलायुक्त और जिलाधिकारी कार्यालय को भेजी थी।

इधर कर्मचारी नेता अशोक मिश्रा ने बताया कि बाम्बे हाईकोर्ट में उन्होंने कर्मचारियों को लेबर कमिश्नर के यहां से 4 नवंबर, 1999 में जारी की गयी अंतिम सेलरी की सत्यापित सूची समेत अन्य अभिलेख उपलब्ध कराए हैं। 270 करोड़ की देनदारी में 12 प्रतिशत कटे पूंजीपति अंश शामिल नहीं है।

यह है रबर फैक्ट्री का इतिहास
बरेली। रबर फैक्ट्री के लिए 1960 के दशक में मुंबई के सेठ किलाचंद को फतेहगंज पश्चिमी में 1382.23 एकड़ जमीन उपलब्ध करायी थी। तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने 3.40 लाख रुपये लेकर जमीन लीज पर दी थी। यह फैक्ट्री 15 जुलाई 1999 को बंद हुई थी। बताते हैं कि फैक्ट्री चालू अवस्था में थी, तब फैक्ट्री प्रबन्धन ने 147 करोड़ का 19 बैंकों से ऋ ण लिया था। लोन अब बढ़कर तीन गुना हो गया। बैंकों और कर्मचारियों का मिलाकर 500 करोड़ रुपये की देनदारी बतायी जा रही है।

मूलधन से ज्यादा हो गया ब्याज, अधिकारी कर रहे मंथन
सोमवार को रबर फैक्ट्री प्रकरण की देनदारियों को लेकर बरेली और लखनऊ के अधिकारियों ने ऑनलाइन बैठक की। जिसमें पीएफ की देनदारी पर चर्चा की। फैक्ट्री पर वाणिज्यकर विभाग की भी बकाया धनराशि निकली है। 2725.52 लाख रुपए मूलधन था, जिसका अब 10725.66 लाख रुपए का ब्याज बन गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट में केस की मजबूत पैरवी करने के लिए जिला प्रशासन हर बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार कर रहा है। उसमें वाणिज्यकर का बकाया सामने आया है।

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