कौन थीं रानी कमलापति, जानें इनके बारे में ये खास बातें…

कौन थीं रानी कमलापति, जानें इनके बारे में ये खास बातें…

इतिहास के पन्नों में देखा जाए तो रानी कमलापति गोंड रानी थीं। 16वीं सदी में भोपाल से 55 किलोमीटक दूर 750 गांवों को मिलाकार गिन्नौरगढ़ राज्य था। जहां के राजा सूराज सिंह शाह (सलाम) थे। इनके पुत्र निजामशाह से कमलापति की शादी हुई थी। कौन थे गोंड राजा निजाम शाह राजा निजाम शाह गोंड के …

इतिहास के पन्नों में देखा जाए तो रानी कमलापति गोंड रानी थीं। 16वीं सदी में भोपाल से 55 किलोमीटक दूर 750 गांवों को मिलाकार गिन्नौरगढ़ राज्य था। जहां के राजा सूराज सिंह शाह (सलाम) थे। इनके पुत्र निजामशाह से कमलापति की शादी हुई थी।

कौन थे गोंड राजा निजाम शाह
राजा निजाम शाह गोंड के राजा थे। उनका साम्राज्य गढ़ा कटंगा (मंडला) 52 गढ़ के आधिपत्य में था। रायसेन किला ईस्वी सन् 1362 से 1419 (57 वर्ष) तक राजा रायसिंह के आधिपत्य में था। बाड़ी, जिला रायसेन के अंतिम शासक चैन सिंह 16वीं सदी में रहे। राजा की सात पत्नियां थीं। जिनमें से सबसे सुंदर रानी कमलापति थीं। कहा जाता है कि राजा निजामशाह रानी कमलापति से सबसे अधिक प्रेम करते थे। राजा ने 1700ईस्वी में प्रेम स्वरूप रानी के लिए भोपाल में सात मंजिला महल का बनवाया था जो कि लखौरी ईंट और मिट्टी से बना था। यह सात मंजिला महल अपनी भव्यता, सुंदरता और खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध था।

इसी समय निजाम शाह के भतीजे आलम शाह का बाड़ी पर शासन था। उसे अपने चाचा निजाम शाह से काफी ईर्ष्या थी। कहा जाता है कि आलम शाह को निजाम शाह की दौलत और संपत्ति के साथ रानी की खूबसूरती से भी ईर्ष्या थी। आलम शाह रानी की खूबसूरती पर मोहित था। उसने रानी से अपने प्यार का इजहार भी किया था, लेकिन रानी ने उसे ठुकरा दिया था।

भतीजे ने कर दी थी निजाम शाह की हत्या
आलम शाह अपने चाचा निजाम शाह के खिलाफ लगातार षडयंत्र करता था। एक बार उसने खाने में जहर मिलाकर उनकी हत्या कर दी। खुद को इन षडयंत्रों से बचाने के लिए रानी अपने बेटे नवल शाह को गिन्नौरगढ़ से भोपाल के रानी कमलापति महल लेकर आ गईं। परेशान रानी कमलापति अपने शौहर की मौत का बदला लेना चाहती थीं, लेकिन फौज और पैसे की कमी के कारण वह मजबूर थीं।

पति की हत्या के बाद बदले की ठानी
राजा निजाम शाह की मौत के बाद रानी कमलापति अपने बेटे नवल शाह को गिन्नौरगढ़ से भोपाल स्थित रानी कमलापति महल ले आईं। रानी कमलापति अपने पति की मौत का बदला लेना चाहती थीं। लेकिन दिक्कत ये थी कि उनके पास न तो फौज थी और न ही पैसे थे।इसके बाद अगर हम इतिहासकारों के सुनें तो रानी कमलापति ने दोस्त मोहम्मद खान से मदद मांगी। वह मदद को तैयार तो हो गया, लेकिन इसके एवज में उसने रानी से एक लाख रुपये की मांग कर दी। रानी कमलापति को बदला लेना था, सो पैसे न रहते हुए भी उन्होंने हामी भर दी। दोस्त मोहम्मद खान कभी मुगल सेना का हिस्सा हुआ करता था। लूटी हुई संपत्तियों के हिसाब में गड़बड़ी के बाद उसे सेना से निकाल दिया गया था। फिर उसने भोपाल के पास जगदीशपुर में अपनी सत्ता स्थापित कर ली थी।

आखिरकार रानी कमलापति ने ले लिया पति की हत्या का बदला
कमलापति के साथ दोस्त मोहम्मद ने निजाम शाह के भतीजे बाड़ी के राजा आलम शाह पर हमला कर उसकी हत्या कर दी और इस तरह कमलापति ने अपने पति की हत्या का बदला ले लिया। हालांकि करार के मुताबिक, रानी के पास दोस्त मोहम्मद को देने के लिए एक लाख रुपये नहीं थे। उस वक्त एक लाख रुपये बहुत होते थे। ऐसे में रानी ने भोपाल का एक हिस्सा उसे दे दिया। लेकिन रानी कमलापति के बेटे नवल शाह को यह रास नहीं आया। ऐसे में नवल शाह और दोस्त मोहम्मद के बीच लड़ाई हो गई। बताया जाता है कि दोस्त मोहम्मद ने नवल शाह को धोखे से जहर देकर मार दिया था।

लालच में दोस्त बन गया था दुश्मन
दोस्त मोहम्मद आज की भाषा में एक सुपारी किलर था, जो धन के बदले रानी का प्रतिशोध पूरा तो करता है लेकिन अकेली रानी के राज्य पर ही दांत गड़ाने का इरादा भी रखता है। रानी जल्दी ही समझ गईं कि “दोस्त’ के रूप में उन्होंने मौत को महल दिखा दिए हैं। रानी के सामने पहले जाने-पहचाने शत्रु अपने ही परिजन थे। अब वे अनजान और बेरहम शत्रुओं से घिर चुकी थीं। इस नए संघर्ष में उनका युवा राजपुत्र नवलशाह मारा गया और किसी धोखेबाज जाहिल के हरम का हिस्सा बनने की बजाए उन्होंने भोपाल के छोटे तालाब में अपने महल से उतरकर जलसमाधि का विकल्प चुन लिया।

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