रामपुर: जौहर विवि में अब नहीं हो सकेगी सर्च, पुलिस का प्रार्थना पत्र खारिज
रामपुर, अमृत विचार। मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय में अब पुलिस सर्च नहीं कर सकेगी। अदालत ने पुलिस के प्रार्थना पत्र को प्रशासन द्वारा गठित तीन मजिस्ट्रेटों की टीम की रिपोर्ट आने के बाद खारिज कर दिया है। रिपोर्ट में लिखे बिंदुओं से अदालत के मकसद को स्पष्ट नहीं किया जा सका। लिहाजा अब पुलिस प्रशासन …
रामपुर, अमृत विचार। मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय में अब पुलिस सर्च नहीं कर सकेगी। अदालत ने पुलिस के प्रार्थना पत्र को प्रशासन द्वारा गठित तीन मजिस्ट्रेटों की टीम की रिपोर्ट आने के बाद खारिज कर दिया है। रिपोर्ट में लिखे बिंदुओं से अदालत के मकसद को स्पष्ट नहीं किया जा सका। लिहाजा अब पुलिस प्रशासन को सर्च वारंट के लिए तथ्यात्मक आधार तलाशना होगा।
बता दें कि स्वार-टांडा विधायक अब्दुल्ला आजम के दो दोस्तों अनवार और सालिम की निशानदेही पर 19 सितंबर को पुलिस ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय में जेसीबी से खुदाई कराकर जमीन में दबी हुई सफाई मशीन बरामद की थी। इसके अलावा 20 सितंबर को तहखाने की दीवार तोड़कर मदरसा आलिया से चोरी की गई अमूल्य पांडुलिपियों और किताबों को बरामद किया था।
पुलिस के पास सूचना है कि जौहर यूनिवर्सिटी में मॉडल मांटेसरी स्कूल के परिसर में लगा संगमरमर का आलीशान फव्वारा, रामपुर क्लब के गेट पर स्वागत को बैठे दो शेरों की मूर्तियां, फ्रांसीसी इंजीनियर डब्ल्यूसी राइट की आदमकद प्रतिमा, नवाब गेट का जीना और कई ऐतिहासिक चीजें भी विश्वविद्यालय में बरामद हो सकती हैं।
गुरुवार को कोतवाली इंस्पेक्टर सत्यवीर सिंह ने एमपी-एमएलए कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर जौहर विश्वविद्यालय में सर्च करने की अनुमति मांगी थी। इस मामले में कोर्ट ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में चिंहित स्थान पर सर्च कराए जाने की बाबत रिपोर्ट तलब की थी।
शनिवार को हुई सुनवाई में अदालत ने एडीएम राजस्व और वित्त को आदेश दिए थे कि तीन मजिस्ट्रेट और पुलिस के साथ जाकर सर्च अभियान चलाने वाली जगह को तय करें। उसके बाद टीम ने जाकर वहां पर जगह चिहिन्त करने के बाद कोर्ट में फाइल पेश कर दी थी। बुधवार को सर्च वारंट के प्रार्थना पत्र को कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
सूत्रों की मानें तो यह पता चला है कि एडीएम के नेतृत्व में जो टीम गई थी जिसने रिपोर्ट अदालत में पेश की थी, उस रिपोर्ट से अदालत संतुष्ट नहीं थी, इसमें चोरी का सामान कहां हो सकता है, यह स्थान ही नहीं तय थे। इसीलिए पुलिस के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया गया।
सर्च वारंट नहीं मिलने से आजम को राहत
सर्च वारंट नहीं मिलने से पूर्व मंत्री आजम खां को थोड़ी राहत मिली है। क्योंकि पुलिस को अगर सर्च वारंट मिलता और तलाशी ली जाती तो कुछ चोरी का सामान बरामद हो जाता तो आजम की मुश्किलें और बढ़ सकती थीं।
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