रायबरेली: अपने ही गढ़ में कांग्रेस ने डाल दिए हथियार, पार्टी हुई चुनाव से बाहर

रायबरेली: अपने ही गढ़ में कांग्रेस ने डाल दिए हथियार, पार्टी हुई चुनाव से बाहर

रायबरेली। कांग्रेस के लिए यह सबसे बुरा दौर है। आजादी के बाद से कांग्रेस का गढ़ रही रायबरेली में भी कांग्रेस हासिए पर पहुंच गई है। इसलिए कांग्रेस ने एमएलसी चुनाव में खुद को बाहर कर लिया है। कांग्रेस ने रायबरेली स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र से कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है। हाल ही में संपन्न हुए …

रायबरेली। कांग्रेस के लिए यह सबसे बुरा दौर है। आजादी के बाद से कांग्रेस का गढ़ रही रायबरेली में भी कांग्रेस हासिए पर पहुंच गई है। इसलिए कांग्रेस ने एमएलसी चुनाव में खुद को बाहर कर लिया है।

कांग्रेस ने रायबरेली स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र से कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है। हाल ही में संपन्न हुए विधान सभा चुनाव में जिले की सभी छः सीटों पर कांग्रेस का खराब प्रदर्शन रहा है। किसी भी सीट पर पार्टी मुकाबले तक में नहीं आ पाई हैं। सबसे खराब प्रदर्शन ऊंचाहार , सदर और सलोन सीट पर रहा है। विधान सभा चुनाव परिणाम से हताश और निराश कांग्रेस ने एमएलसी का चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया है। या यूं कहें कि कांग्रेस को उसके गढ़ और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र  रायबरेली में एमएलसी के लिए कोई मजबूत उम्मीदवार नहीं मिल पाया हैं।

ऐसे में कांग्रेस संगठन और रायबरेली में सोनिया गांधी का काम देखने वालों की क्षमता पर सवाल खड़ा हो रहा है। कांग्रेस के लिए रायबरेली से निकला यह संदेश राष्ट्रीय पटल पर भी कांग्रेस को परेशान करने वाला है। सवाल है कि जब कांग्रेस अपने घर रायबरेली में लगातार कमजोर होती जा रही है और उसका यह हाल हो गया है कि पार्टी को उम्मीदवार न मिले तो उसकी नींव की मजबूती का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।

कांग्रेस एमएलसी अब भाजपा उम्मीदवार

रायबरेली से एमएलसी का पिछला चुनाव दिनेश प्रताप सिंह ने लड़ा था। उन्हे विजय भी हासिल हुई थी। लेकिन कुछ समय बाद उनका कांग्रेस के नेतृत्व व सोनिया गांधी के प्रतिनिधि किशोरीलाल शर्मा से मनमुटाव हो गया। और यह दूरी इतनी बढ़ गई कि उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। इस बार वह भाजपा के टिकट पर एमएलसी चुनाव के मैदान में है।

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