बरेली: जेलर बाग को बना दिया पेड़ों का श्मशान, दर्जनों वृक्ष जलाए

बरेली: जेलर बाग को बना दिया पेड़ों का श्मशान, दर्जनों वृक्ष जलाए

बरेली, अमृत विचार। कोरोना काल के दौरान हुई प्राणवायु ऑक्सीजन की किल्लत का जो दृश्य देश भर में देखने को मिले उससे एक बात का सबक तो लिया ही जा सकता था कि हम अपने-आसपास पेड़ लगाएं और पेड़ों को कटने से बचाएं। लेकिन बढ़ता शहरीकरण का दायरा और आबाद होती नई बस्तियां, जंगलों के …

बरेली, अमृत विचार। कोरोना काल के दौरान हुई प्राणवायु ऑक्सीजन की किल्लत का जो दृश्य देश भर में देखने को मिले उससे एक बात का सबक तो लिया ही जा सकता था कि हम अपने-आसपास पेड़ लगाएं और पेड़ों को कटने से बचाएं। लेकिन बढ़ता शहरीकरण का दायरा और आबाद होती नई बस्तियां, जंगलों के साथ हो रही क्रूरता हर दिन पर्यावरण के प्रति मानवीय संवेदना क्षीण हो जाने की ओर इशारा कर रही हैं।

ताजा मामला बरेली के सीबीगंज क्षेत्र स्थित मथुरापुर के नजदीक जेलर बाग का है। जहां जमीन सपाट करने के लिए हजारों पेड़ों को बलि चढ़ा दिया गया। किसी जमाने में जहां लहलाता बाग हुआ करता था वहां निगाह उठाने पर साफ मैदान दिखेगा। निर्दयता का आलम यह है कि पेड़ों को खत्म करने के लिए काटने के बाद उनकी जड़ों को आग के हवाले कर दिया गया।

एक दर्जन से अधिक पेड़ों की जली हुई जड़ें इस बात की गवाह हैं कि हमें प्राणवायु ऑक्सीजन देने वाले पेड़ों के प्रति यहां कंकरीट का जंगल खड़ा करने का इरादा रखने वालों में पर्यावरण के प्रति जरा भी संवेदना नहीं। आम और बांस जैसे पेड़ों को काटने के बाद उनकी जड़ों को आग लगा दी गई।

एक बार को देखने में यह पेड़ों का श्मशान लगता है। दूसरी तरफ पेड़ों के साथ हुई इस क्रूरता पर वन विभाग के अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। पेड़ों को काटने की अनुमति ली गई थी इस बारे में पूछने पर अधिकारी गोलमोल जवाब देते हैं। लिहाजा घने बाग को श्मशान में तब्दील करने के लिए विभागीय मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।

पूरे मामले में सर्वजीत बख्शी का नाम खुलकर सामने आ रहा है, खुद को सर्वजीत का भाई बताने वाले जसविंदर सिंह ने इस बात को कबूला कि जड़ों को उखाड़ने के लिए उनमें आग लगाई गई। बता दें कि भारी संख्या में बांस के पेड़ों को यहां काटकर जलाया गया है, जबकि वन विभाग के अधिकारी बांस के पेड़ को काटने के लिए प्रतिबंधित बताते हैं।

रिपोर्ट दर्ज होने के बाद खुला मामला
स्थानीय लोगों की माने तो बाग को उजाड़ने का काम तो कई साल से चल रहा था। मगर मामला उस वक्त खुला जब मंगलवार को हाइवे किनारे लगे वन विभाग के पेड़ों को प्रापर्टी डीलर के गुर्गों ने काटना शुरू कर दिया। मौके पर पहुंचे वनकर्मी ने अनुमति मांगी तो उससे अभद्रता की गई। तीन जेसीबी मशीनों से हाइवे किनारे लगे पेड़ों को नष्ट किया जा रहा था। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो दो जेसीबी मशीनों के चालक मशीन लेकर फरार हो चुके थे जबकि एक जेसीबी मशीन को जब्त कर सर्वजीत बख्शी नाम के शख्स पर वन अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज हुई। प्रभागीय वनाधिकारी ने अब पूरे मामले की जांच के लिए एक टीम का गठन किया है।

हाइवे किनारे के पेड़ों को भी काटा
जेलर बाग पर कालोनी बसाने की बात कही जा रही है। मंगलवार को पेड़ हाइवे किनारे लगे वन विभाग के पेड़ों को काटे जाने की घटना इस बात की तस्दीक करती है। दरअसल हाइवे किनारे लगे पेड़ जमीन के फ्रंट को ढकते हैं। यही वजह थी कि बाग की जमीन से हटकर मंगलवार को हाइवे किनारे के पेड़ काटे जाने लगे। जिस पर वन विभाग के कर्मियों ने आपत्ति जताई और बाद में रिपोर्ट दर्ज की गई।

चंद वर्षों में ही घने बाग से जेलर बाग बना मैदान
स्थानीय लोग बताते हैं कि एक जमाने में जिनका यह बाग था वह जेलर रहे होंगे लिहाजा बाग का नाम जेलर बाग पड़ गया। यहां जंगलनुमा घना बाग हुआ करता था, इतना घना कि शाम के वक्त कोई यहां आने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाता था। भारी संख्या में आम के पेड़ हुआ करते थे जिनमें उगने वाले आमों की नीलामी कई-कई दिन तक चला करती थी। रामपुर रोड किनारे जेलर बाग करीब 350 बीघा जमीन पर फैला था। आम के अलावा शीशम और बांस सहित ढेरों प्रजातियों के 25,00 ढाई हजार से अधिक से पेड़ लहलहाते थे। मगर कुछ साल से पेड़ों का कटान जारी है। चंद पेड़ काटने अनुमति लेकर दर्जनों पेड़ कटवा दिए जाते।

इनकी सुनें

बाग था तो पर्यावरण भी अच्छा था मगर दो साल के अंदर सभी पेड़ों को कटवा दिया गया। प्रॉपर्टी डीलर यहां एक कालोनी बसाना चाहता है। वन विभाग से लेकर डीएम तक से शिकायत की है मगर कार्रवाई नहीं हुई। -धर्मवीर साहू, पार्षद

अधिकारी जगह-जगह पेड़ लगा रहे हैं मगर यहां भारी संख्या में पेड़ काट दिए गए। ब्रिटिश कालीन इस बाग की जगह पर आज कालोनी बसाने की तैयार है। अगर यह काम नहीं रुका तो आंदोलन किया जाएगा। -बोहरन लाल, स्थानीय

पेड़ अगर अनुमति लेकर काटे भी जा रहे हैं तो एक मानवीय तरीका होता है। पेड़ों को जलाना अपने आप में क्रूरता का विषय है। किसी भी पर्यावरण प्रेमी के लिए यह नगवार गुजरने वाली बात है। संवेदनाओं के आधार पर बात करें तो पेड़ों की छटाई तक को सही नहीं माना जाता पेड़ों को जलाना तो दूर की बात है। -डा. आलोक खरे, वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष, बरेली कॉलेज

जेलर बाग प्रकरण में अधिकारी नियुक्त कर जांच की जा रही है,जांच में जो भी निकलकर सामने आएगा उसके आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी। जेसीबी मशीन जब्त कर रिपोर्ट लिखी गई थी। -भारत लाल, प्रभागीय वनाधिकारी

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