बात तीसरी लहर की

कोरोना महामारी की दृष्टि से देश में स्थिति हर दिन के साथ बेहतर होती जा रही है। वहीं आगामी छह से आठ सप्ताह में कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना जताई जा रही है। कई राज्यों में कोरोना वायरस के नया वेरिएंट ‘डेल्टा प्लस’ से संक्रमित मरीज पाए जा रहे हैं। इस बार का …
कोरोना महामारी की दृष्टि से देश में स्थिति हर दिन के साथ बेहतर होती जा रही है। वहीं आगामी छह से आठ सप्ताह में कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना जताई जा रही है। कई राज्यों में कोरोना वायरस के नया वेरिएंट ‘डेल्टा प्लस’ से संक्रमित मरीज पाए जा रहे हैं। इस बार का वेरिएंट पहले की अपेक्षा कहीं अधिक खतरनाक है। इससे निपटने को राज्य सरकारें योजनाएं तैयार कर रही हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार भी नए वेरिएंट डेल्टा प्लस को लेकर सतर्क हो गई है और इससे बचाव के लिए उठाए जा रहे कदमों के तहत बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों की जीनोम सिक्वेंसिंग पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार नया वेरिएंट बच्चों पर कहीं अधिक दुष्प्रभाव डालने वाला हो सकता है। निस्संदेह हर नए वेरिएंट को खतरे व चुनौती के रूप में देखा जाना चाहिए। यह वायरस अधिक संक्रमण क्षमता के चलते ही लगातार म्यूटेंट कर रहा है, जिसके चलते देश में दूसरी घातक लहर का सामना किया गया था।
वैसे कहा जा रहा है कि डेल्टा प्लस वेरिएंट का पहला मामला यूरोप में पाया गया और अब अमेरिका व रूस समेत कई देशों में इसका प्रभाव है। फिर भी इसकी उत्पत्ति के बारे में ठोस जानकारी जुटाना जरूरी है। इसके बारे में सावधानी से अध्ययन करना भी जरूरी है। तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच वेरिएंट के संक्रमण और मरीजों पर होने वाले प्रभाव का तेजी से अध्ययन करना भी जरूरी है।
हालांकि, अभी कोई ठोस वजह नहीं है कि नए डेल्टा प्लस वेरिएंट को बहुत घातक ही मान लिया जाए। फिलहाल नए वायरस के संक्रमण में तीव्रता की पर्याप्त जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन आने वाले दिनों में उम्मीद की जा रही है कि इस वेरिएंट की संक्रमण की तीव्रता की ठोस जानकारी सामने आ सकेगी। बहरहाल, भारत में इसे तीसरी लहर की दस्तक के रूप में देखते हुए सतर्कता और कुशल प्रबंधन से मुकाबला करने की जरूरत है।
साथ ही इस संक्रमण से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययन के निष्कर्ष तुरंत सार्वजनिक किए जाएं ताकि समय रहते देश इससे लड़ाई के लिये तैयार हो सकें। साथ ही अंतिम सुरक्षा कवच टीकाकरण में और तेजी लाए जाने की जरूरत है। यद्यपि टीकाकरण अभियान में तेजी आई है, लेकिन इसे और तेज करने की जरूरत है। हालांकि, सवा अरब से ज्यादा आबादी वाले देश में संपूर्ण टीकाकरण करना अपने आप में बड़ी चुनौती है। हमें समझना होगा कि वायरस से इस लड़ाई में सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है।