बरेली: निजी कोविड अस्पतालों ने आपदा को अवसर में बदला!, इस तरह वसूल रहे मनमर्जी का बिल

बरेली, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण के इस भयावह दौर से निपटने के लिए निजी अस्पताल में भी संक्रमितों के इलाज का निर्देश शासन की ओर से दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद थी कि निजी अस्पतालों की मदद से बेड की उपलब्धता के साथ-साथ संक्रमितों को सुविधाजनक इलाज मिलेगा, लेकिन निजी अस्पतालों ने इस …
बरेली, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण के इस भयावह दौर से निपटने के लिए निजी अस्पताल में भी संक्रमितों के इलाज का निर्देश शासन की ओर से दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद थी कि निजी अस्पतालों की मदद से बेड की उपलब्धता के साथ-साथ संक्रमितों को सुविधाजनक इलाज मिलेगा, लेकिन निजी अस्पतालों ने इस आपदा के समय को अवसर में परिवर्तित कर लिया है। जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कुल 17 कोविड अस्पताल बनाये गये हैं, जिनमें 13 निजी अस्पताल हैं।
वहीं मेडिकल कॉलेज में भी निजी खर्च पर इलाज कराने की सुविधा उपलब्ध है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों के शुल्क को निर्धारित किया था, लेकिन संक्रमण काल में कार्रवाई न होने के कारण निजी अस्पताल संचालक निर्धारित मानदंड से कई गुना ज्याद बिल बनाकर तीमारदार से वसूल रहे हैं।
शासन की ओर इलाज के लिए निर्धारित शुल्क
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार शासन की ओर से प्रदेश में ए, बी और सी कैटेगरी में कोविड अस्पतालों का शुल्क निर्धारित किया गया है। इसमें बरेली को ए ग्रेड में रखा गया है। इसमें कोविड अस्पताल के जनरल बेड के लिए 10 हजार रुपये, आइसीयू के लिए 15 हजार रुपये और वेंटीलेटर के साथ आइसीयू के लिए 18 हजार रुपये प्रतिदिन की फीस निर्धारित की गई है। वहीं जनरल बेड में पीपीई की 1200 रुपये, आइसीयू और वेंटीलेटर में दो हजार रुपये में पीपीई किट की फीस भी शामिल है।
इन सुविधाओं के भी जोड़ रहे रुपये
नर्सिंग केयर, मॉनीटरिंग, डॉक्टर विजिट, भोजन, पीपीई किट, जांच, सलाह और परीक्षण के लिए भी निजी अस्पतालें में रुपये लिए जा रहे हैं। जबकि ये आपदा अधिनियम के तहत दंडनीय है। वहीं, निजी अस्पतालों की ओर से इसे आवश्यक खर्च में जोड़ा जा रहा है।
केस 1: कई घंटों के इंतजार के बाद 90 हजार लेकर मरीज को किया भर्ती
प्रेमनगर निवासी एक दंपति की बीते दिनों तबीयत खराब होने पर उन्होंने कोरोना जांच कराई। जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई। काफी परेशानी के बाद स्टेडियम रोड स्थित कोविड अस्पताल पहुंचे। वहां पहुंचने पर अस्पताल कर्मियों की ओर से बेड उपलब्धता के लिए मना कर दिया गया। जानकारी देने पर अंदर बुलाया गया, कोविड वार्ड में भर्ती करने से पहले उनसे 50 हजार रुपये जमा करने के लिए कहा गया। उन्होंने रुपये जमा करा दिए। वह वार्ड तक पहुंचे भी नहीं थे कि दो सदस्य होने से उनसे फिर 40 हजार रुपये और मांग लिए गए। इलाज में देरी होने पर उन्होंने नाराजगी भी जताई लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं की।
केस 2: सप्ताह भर में ढाई लाख जमा करने के बाद नहीं बच सकी जान
सिविल लाइंस स्थित एक निजी अस्पताल में कुछ दिन पहले एक अधिकारी ने अपने रिश्तेदार को भर्ती कराया था। गंभीर होने पर वह आईसीयू में भर्ती हुए। जिसकी शासन से निर्धारित शुल्क 15 हजार रुपये प्रतिदिन है। उनसे मरीज के भर्ती होने से पहले ही 50 हजार रुपये जमा करा लिए। बाद में और रुपये भी लिए गए। करीब सप्ताह भर के उपचार के बाद भी उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शव ले जाने से पहले अस्पताल की ओर से उन्हें 1.05 लाख का बिल थमा दिया गया। जिसमें दवा समेत कई खर्च दिखाए गए।
“बीते कुछ दिनों से इस तरह की सूचना मिली थी, लेकिन किस अस्पताल की थी यह जानकारी नहीं दी गई। निजी अस्पतालों की ओर से कोविड मरीजों से निर्धारित शुल्क से अधिक लिए जाने की कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। लिखित शिकायत मिलने पर संबंधित अस्पतालों पर कार्रवाई की जाएगी।” -डॉ. रंजन गौतम, जिला सर्विलांस अधिकारी