मौनपालन बॉक्स हटाने पर रास्ता भूल जाती हैं मधुमक्खियां, फिर आपस में लड़कर दे दी है जान...जानें वजह

बरेली, अमृत विचार। आईवीआरआई के कृषि एवं बागवानी विशेषज्ञ डाॅ. रंजीत सिंह मधुमक्खियों के व्यवहार पर लंबे समय से अध्ययन कर रहे हैं। उनका कहना है कि मधुमक्खियां करीब तीन किमी के दायरे में फूलों से परागकण छत्ते में लाकर शहद बनाती हैं। परागकण लाने वाली मधुमक्खियों को कमेरिया बोलते हैं जो अक्षांश-देशांतर की पहचान रखने वाले ऐसे कुदरती जीपीएस सिस्टम से लैस होती हैं कि घंटों इधर-उधर घूमने के बावजूद सीधे अपने छत्ते में आती हैं।
वर्ना नहीं मिलेगा शहद, आपस में ही लड़ मरेंगी मधुमक्खियां
रिसर्च में पता चला है कि मौन पालन करने वाले किसानों के बॉक्सों को बेवजह इधर से उधर करते रहने से भारी नुकसान होता है, जिसका उन्हें पता भी नहीं चलता। रास्ता भूल जाने से मधुमक्खियां घर नहीं लौट पातीं और रास्ता न मिल पाने की बौखलाहट में आपस में लड़कर मर जाती हैं। डॉ. रंजीत सिंह के मुताबिक बॉक्स को हटाना ही है तो एक बार में छह इंच से ज्यादा न हटाएं। वह भी हर दिन नहीं।
बनाती हैं खतरों से निपटने की रणनीति
मधुमक्खियों का अपना प्रबंधन भी एक मिसाल है। रानी मक्खी अंडे देती है, कमेरिया शहद लाती हैं, नर सिर्फ प्रजनन करते हैं। शहद बनाने औेर अंडों की रक्षा का काम भी बंटा है। छत्ते में मधुमक्खियों की बैठकों में सूचनाओं का आदान प्रदान होता है। खतरे और दुश्मनों (चिड़ियों) से निपटने की भी रणनीति बनती है। ये मक्खियां डांस भी करती हैं।
लड़ाकू नंबर- 1
छत्ते में मौजूद रानी मधुमक्खी के शरीर से गंध निकलती है जिसे फेरामोन कहते हैं। पूरा छत्ता इस महक को पहचानता है। अगर किसी दूसरे छत्ते के मक्खी इसमें घुस जाए तो सैनिक मधुमक्खियां उसको मार देती है। उस रानी मक्खी को भी मार देती हैं, जिसके अंडे देने की क्षमता कम हो गई हो।
नर मधुमक्खी सिर्फ प्रजनन के लिए
नर मधुमक्खी को ड्रोन कहते हैं जो हमेशा छत्ते में रहता है और रानी को गर्भवती करने के लिए ही उसके साथ बाहर 50 से 100 मीटर दूर 20 मीटर ऊंचाई तक उड़ता है। प्रजनन के बाद ड्रोन का जननांग रानी के शरीर में ही रह जाता है और वह तुरंत जमीन पर गिरकर मर जाता है। छत्ते में आने के बाद रानी के शरीर से उसका जननांग कमेरिया मक्खी निकालती हैं।
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