उम्र के 100 पड़ाव...जीवन में सैकड़ों उतार-चढ़ाव, ऐसी रही मां हीराबेन की संघर्ष गाथा

उम्र के 100 पड़ाव...जीवन में सैकड़ों उतार-चढ़ाव, ऐसी रही मां हीराबेन की संघर्ष गाथा

अहमदाबाद। इस दुनिया का सबसे सुंदर शब्द होता है 'मां'। मां जो हर परस्थिति में साथ देती है। जब भी संकट आता है, बस मां ही याद आती है। किसी ने खूब कहा है, 'मां के कंधे पर जब सिर रखा मैंने तो पूछा कब तक यूंही अपने कंधे पर सोने देगी…मां ने कहा बेटा- तब तक जब तक लोग मुझे अपने कंधे पर उठा नहीं लेंगे।

मां... यह सिर्फ एक शब्द नहीं, यह जीवन की वह भावना है, जिसमें स्नेह, धैर्य, विश्वास, कितना कुछ समाया हुआ है। दुनिया का कोई भी कोना हो, कोई भी देश हो, हर संतान के मन में सबसे अनमोल स्नेह मां के लिए होता है।

मां, सिर्फ हमारा शरीर ही नहीं गढ़ती बल्कि हमारा मन, हमारा व्यक्तित्व, हमारा आत्मविश्वास भी गढ़ती है और अपनी संतान के लिए ऐसा करते हुए वो खुद को खपा देती है, खुद को भुला देती है। मेरी मां जितनी सामान्य हैं, उतनी ही असाधारण भी। ठीक वैसे ही, जैसे हर मां होती है।

यह शब्द है भारत देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जिनकी मां हीराबा मोदी का आज तड़के करीब साढ़े तीन बजे 100 वर्ष की उम्र निधन हो गया। उनका पिछले दो दिनों से अहमदाबाद के अस्पताल में इलाज चल रहा था। अपनी मां की तबीयत बिगड़ने की खबर मिलने के बाद, नरेंद्र मोदी दिल्ली से अहमदाबाद आए और अपनी मां के स्वास्थ्य के बारे में पूछा।

अस्पताल ने यह भी कहा कि हीराबा की सेहत में सुधार हो रहा है। हालांकि, उन्होंने 30 दिसंबर 2022 को तड़के 3 बजकर 30 मिनट पर आखिरी सांस ली।

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मां हीराबा का जीवन और उतार चढ़ाव
हीराबा का जन्म 18 जून साल 1923 को मेहसाणा जिले के विसनगर में हुआ था। हीराबा ने बचपन में ही अपनी मां का प्यार खो दिया था। उनकी मां की मौत स्पेनिश फ्लू महामारी में हुई थी। हीराबा का बचपन गरीबी में बीता  उनका बचपन संघर्षों से भरा रहा था।

इस लिए वह कम उम्र में ही चुनौतियों से परिपक्व हो गई थी। हालांकि वह परिवार में सबसे बड़ी थी जिस कारण घर की सारी जिम्मेदारी उनके सिर पर आ गई और उन्होंने बचपन में ही परिवार की जिम्मेदारी भी उठा ली थी।

नरेंद्र मोदी ने  उन्होंने उल्लेख किया था कि कैसे उनकी मां न केवल घर के सभी काम खुद करती थीं बल्कि घर की मामूली आय को पूरा करने के लिए बाहर भी काम करती थीं। वह कुछ घरों में बर्तन धोती थीं और घर के खर्चों को पूरा करने के लिए चरखा चलाने के लिए भी समय निकालती थीं। 

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गरीबी में बीता जीवन नहीं मानी हार 
हीराबा का विवाह गुजरात के वडनगर में एक छोटे से घर में रहने वाले मोदी परिवार में हुआ था। लेकिन शादी के बाद भी हीराबा के जीवन में संघर्ष रहा  शादी के तुरंत बाद ही उन्होंने मोदी परिवार की सारी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली थी। हीराबा का परिवार वडनगर में एक छोटे से घर में रहता था।

हीरबा के पति दामोदरदास मोदी ने बांस के डंडे और लकड़ी के तख्तों से एक चबूतरा बनाया हुआ था उसमें ही हीराबा खाना बनाती थी। हीराबा का जीनव हमेशा से ही संघर्षों से भरा रहा था। वह घर का खर्च चलाने के लिए घरों की साफ-सफाई करती थीं  समय बीतने के साथ नरेंद्र मोदी बड़े हो गए थे।

हीराबा गांधीनगर के रायसन में अपने बेटे पंकज मोदी के साथ रहती हैं। 18 जून 2022 को 100 साल की हुईं हीरा बा इस उम्र में भी अपना काम खुद करने की जिद पर अड़ी थीं।

हीराबा के जन्मदिन पर आयोजित हुए थे विभिन्न कार्यक्रम

हीराबा के 100 वर्ष पूरे होने पर 18 जून 2022 को वडनगर में उनके 100 वर्ष पूरे होने पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। 18 जून 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी रायसन आए और मां से मिले थे।

वडनगर के हाटकेश्वर महादेव मंदिर में 100 दीवानी आरती की गई थी। वडनगर के हर स्कूल में बच्चों को पोषाहार भी दिया गया। साथ ही वडनगर में नवचंडी यज्ञ किया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बताया था कि उन्हें एक छोटे सा घर याद है। जिसकी छत के लिए मिट्टी की दीवारें और मिट्टी की टाइलें थीं, जहां वे अपने माता-पिता और भाई-बहनों के साथ रहते थे।मोदी ने लिखा था कि घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद वह अपने बच्चों को शिक्षा देने के लिए दूसरे के घरों में भी काम करने के लिए तैयार हो गईं। पीएम ने आगे कहा हीरा बा चाहती थीं कि उनके सभी बच्चे पढ़ लिखकर शिक्षित बनें।

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