केरल: प्रिया वर्गीज के चयन में सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया: कुलपति

केरल: प्रिया वर्गीज के चयन में सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया: कुलपति

कन्नूर (केरल)। केरल उच्च न्यायालय के एक मलयालम एसोसिएट प्रोफेसर की प्रस्तावित नियुक्ति के खिलाफ एक याचिका को स्वीकार करने के एक दिन बाद कन्नूर विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को दावा किया कि चयन में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा अनिवार्य सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।

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उसने संकेत दिया कि विश्वविद्यालय अपील नहीं करेगा। कन्नूर विश्वविद्यालय के कुलपति गोपीनाथ रवींद्रन ने कहा कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के निजी सचिव के. के. रागेश की पत्नी प्रिया वर्गीज के चयन से पहले कानूनी राय मांगी गई थी।

उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा कि हालांकि यूजीसी से उनकी योग्यता के बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं मिला है और अगर शीर्ष शैक्षणिक निकाय ने उनके पत्र का जवाब दिया होता, तो यह मुद्दा नहीं बिगड़ता।

रवींद्रन ने कहा, ‘‘यूजीसी को पत्र इस बिंदु पर स्पष्टीकरण के लिए भेजा गया था कि क्या राज्य सरकार द्वारा संकाय विकास कार्यक्रम (एफडीपी) के तहत प्रतिनियुक्ति पर पीएचडी शोध के लिए उम्मीदवार द्वारा दी गई अवधि को एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए सीधी भर्ती के वास्ते शिक्षण शोध अनुभव के रूप में माना जाना चाहिए।’’

अदालत ने कहा था कि संबंधित उम्मीदवार प्रिया वर्गीज के पास यूजीसी विनियमन 2018 के तहत निर्धारित प्रासंगिक अवधि का वास्तविक शिक्षण अनुभव नहीं है। अदालत ने कहा था, ‘‘शिक्षण अनुभव केवल एक वास्तविक तथ्य हो सकता है, न कि कल्पना या अनुमान। इसे वास्तविक होना चाहिए और इसका अनुमान या निहितार्थ नहीं लगाया जा सकता है।”

रवींद्रन ने कहा कि विस्तृत फैसले की प्रति प्राप्त होने के बाद उच्च न्यायालय के निर्णय पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यह पूछे जाने पर कि क्या विश्वविद्यालय वर्तमान फैसले के खिलाफ अपील करेगा, उन्होंने मना करते हुए कहा कि इसके लिए बहुत सारा पैसा खर्च करना होगा, लेकिन आगे की किसी भी कार्रवाई के बारे में निर्णय, फैसले की प्रति प्राप्त होने के बाद किया जाएगा।

रवींद्रन ने कहा कि फैसले का शैक्षणिक क्षेत्र में दूरगामी प्रभाव होगा और एफडीपी के तहत शोध करने वाले संकाय के लिए झटका होगा। वर्गीज को विश्वविद्यालय द्वारा मलयालम विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त करने का प्रस्ताव दिया गया था, और इसे लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था, क्योंकि उनके (वर्गीज के) शोध अंक न्यूनतम थे, जबकि साक्षात्कार के दौर में उन्हें सर्वाधिक अंक मिले थे और उन्हें चयन प्रक्रिया में प्रथम घोषित किया गया था।

राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के तौर पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने उनकी नियुक्ति पर रोक लगा दी थी और आरोप लगाया था कि कन्नूर विश्वविद्यालय का उन्हें नियुक्त करने का कदम “राजनीतिक” था।

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