तालमेल की कमी

तालमेल की कमी

अधिकांश राज्यों में बिजली संकट गहरा गया है। ज्यादातर बिजलीघरों के पास विद्युत उत्पादन के लिए पर्याप्त कोयला नहीं है। गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ जाती है। सवाल है कि हर बार ऐसी नौबत क्यों आती है कि दस-दस घंटे की बिजली कटौती करनी पड़ जाए। बिजली संकट के लिए अब तक …

अधिकांश राज्यों में बिजली संकट गहरा गया है। ज्यादातर बिजलीघरों के पास विद्युत उत्पादन के लिए पर्याप्त कोयला नहीं है। गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ जाती है। सवाल है कि हर बार ऐसी नौबत क्यों आती है कि दस-दस घंटे की बिजली कटौती करनी पड़ जाए। बिजली संकट के लिए अब तक कोयला उत्पादन में कमी की बात कही जाती रही है, जबकि दूसरी ओर देश में कोयले की कमी नहीं होने का दावा भी सुनने को मिल रहा है।

अब कहा जा रहा है कि कोयले की आपूर्ति में कमी के चलते संकट खड़ा हुआ है। बिजली संकट का मुद्दा कोयले की ढुलाई से भी जुड़ा है। ऐसे में रेलवे ने 1100 ट्रेनों का संचालन 24 मई तक के लिए बंद कर दिया है ताकि मालगाड़ियों के लिए रास्ता साफ रहे और कोयला आपूर्ति निर्वाध जारी रहे। इसमें 500 एक्सप्रेस जबकि 580 पैसेंजर ट्रेनें शामिल हैं।

ट्रेनों के रद किए जाने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। गर्मी की छुट्टियां होने की वजह से बड़ी संख्या में लोग यात्राएं करते हैं, ऐसे में रेलवे का यह कदम रेल यात्रियों के लिए थोड़ा मुश्किल खड़ी करने वाला है। बिजली मंत्रालय ने एक आधिकारिक आदेश में माना है कि ऊर्जा के संदर्भ में बिजली की मांग में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मांग में वृद्धि को देखते हुए बिजली मंत्रालय ने सभी आयातित कोयला बिजली संयंत्रों को पूरी क्षमता से संचालित करने का आदेश दिया हैं।

गौरतलब है कि देश पिछले छह वर्षों में सबसे बुरे बिजली संकट का सामना कर रहा है। हालांकि इस संकट को लेकर केंद्र सरकार सक्रिय हो गई है। शुक्रवार को बिजली मंत्रालय की एक बैठक में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर. के. सिंह ने जोर दिया कि राज्यों को अपने बिजली संयंत्रों में कोयले की आवश्यकता में कमी को पूरा करने के लिए रेल-सह-सड़क (आरसीआर) मोड में ऑफ-टेक सुनिश्चित करके अपने बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए।

उधर केंद्रीय कोयला और खनन मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 20 बंद खदानों का पुनः संचालन करवाया जो चालू नहीं थीं। दावा है कि इन बंद खदानों के चलने से कोयले की आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिलेगी। कहा जा सकता है कि पूर्व के संकटों से सबक लेते हुए समय रहते व्यापक प्रबंध किए जाएं तो लोगों को होने वाली परेशानियों से बचाया जा सकता है। लगता है बिजली की कमी से कहीं ज्यादा बड़ा संकट संबंधित मंत्रालयों में तालमेल की कमी का है।

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