(Amrit Vichar Exclusive) हल्द्वानी: गफूर बस्ती में रहस्यमयी बुखार से दो बच्चों की मौत

(Amrit Vichar Exclusive) हल्द्वानी: गफूर बस्ती में रहस्यमयी बुखार से दो बच्चों की मौत

हल्द्वानी, अमृत विचार। गफूर बस्ती में रहस्यमयी बुखार से एक ही परिवार के दो बच्चों की मौत हो गई। जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यहां का दौरा किया। अन्य बच्चों में भी संक्रमण फैल रहा है। गुरुवार को गफूर बस्ती के दो बच्चों की मौत हो गई। इसमें एक की उम्र छह …

हल्द्वानी, अमृत विचार। गफूर बस्ती में रहस्यमयी बुखार से एक ही परिवार के दो बच्चों की मौत हो गई। जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यहां का दौरा किया। अन्य बच्चों में भी संक्रमण फैल रहा है।

गुरुवार को गफूर बस्ती के दो बच्चों की मौत हो गई। इसमें एक की उम्र छह वर्ष और दूसरे की चार वर्ष है। एक बच्चे की मौत सुशीला तिवारी अस्पताल में उपचार के दौरान हुई है। यहां एक सप्ताह से कई बच्चों में यह बुखार फैला हुआ है। बुखार से पहले बच्चों के शरीर पर दाने निकल रहे हैं और बाद में बुखार आ रहा है।

आशा कार्यकत्रियों ने इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी। बच्चों की मौत के मामले का संज्ञान लेते हुए एसीएमओ डॉ. रश्मि पंत और जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. अजय शर्मा शुक्रवार को बस्ती का दौरा करने पहुंचे। यहां उन्होंने मृतक बच्चों के परिजनों से जानकारी हासिल की। इसके अलावा उन्होंने अन्य बच्चों की भी जांच की।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वह हर पहलू पर जांच कर रहे हैं। बच्चों के शरीर में दाने निकल रहे हैं और बुखार आ रहा है। सभी कारणों की भी जांच की जा रही है। इधर, बस्ती में फैले रहस्यमयी बुखार की वजह से लोगों में दहशत है। दो बच्चों की मौत के बाद लोगों को अपने बच्चों की फिक्र हो रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि वह लगातार बस्ती का दौरा करेंगे और हर तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

आशा कार्यकत्रियों को भी जिम्मेदारी दी गई है कि वह स्थिति पर पूरी नजर रखें। अगर कहीं भी खतरा बढ़ते दिखे तो तुरंत स्वास्थ्य विभाग को जानकारी दें। इधर, स्वास्थ्य विभाग को डर सता रहा है कि अन्य बच्चों में भी कहीं बीमारी फैल न फैल जाए क्योंकि बस्ती के लोग पूरे शहर में आवाजाही करते हैं। बस्ती की रहने वाली नाजिमा ने बताया कि उसके दो साल के बच्चे साहिल के शरीर पर भी दाने निकल रहे हैं और उसे बुखार भी आ रहा है। कमला ने बताया कि उसके तीन साल के बेटे अंश को भी बुखार आ रहा है और शरीर पर दाने निकल रहे हैं।

बच्चों को टीका लगाएंगे तो हम काम कैसे करेंगे
हल्द्वानी। गफूर बस्ती में अशिक्षा भी एक बड़ी वजह है। यहां मां और बच्चे को लगाए जाने वाले टीकाकरण को लेकर तमाम तरह की भ्रांतियां हैं। ज्यादातर माता-पिता का मानना है कि टीका लगने के बाद बच्चे देर तक रोते हैं और उन्हें बुखार आता है। जिस वजह से उनकी देखरेख करनी पड़ती है। ऐसे में अगर बच्चों को टीका लगा दिया जाएगा तो उनको घर और बाहर का काम करने में दिक्कत आएगी। इसलिए यहां ज्यादातर माता-पिता अपने बच्चों को टीका लगाने से बचते हैं। यही नहीं लोगों में यह भी भ्रांति है कि अगर उनके बच्चे लोगों के ज्यादा संपर्क में आएंगे तो उन्हें बुरी नजर लग जाएगी। इस वजह से यहां जब आशा कार्यकत्रियां या स्वास्थ्य विभाग की टीम आ रही है तो लोग अपने बच्चों को उन्हें दिखाने से कतरा रहे हैं।

झोलाछाप से मिलना पड़ा स्वास्थ्य विभाग को
हल्द्वानी। बस्ती के लोगों के इलाज का जिम्मा यहां झोलाछाप के पास है। बस्ती के निकट एक झोलाछाप के पास लोग अपनी बीमारियों का इलाज करवाने जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारी जब यहां दौरे पर आए तो उन्हें झोलाछाप के पास जाना पड़ा और उनसे बच्चों की बीमारी के बारे में पता करना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने लोगों को सचेत किया कि वह अपना उपचार सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों से कराएं।

टोने-टोटके का ले रहे सहारा
हल्द्वानी। गफूर बस्ती के लोग बच्चों का सही से उपचार कराने के बजाय टोने और टोटके का सहारा ले रहे हैं। लोगों का मानना है कि बच्चों को माता निकल आई है। इस वजह से यह बीमारी हो रही है। ज्यादातर लोग काठगोदाम में किसी ओझा के पास बच्चों को झड़वाने के लिए जा रहे हैं। जिस वजह से बच्चों को सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। लोगों का मानना है कि यह दैवी प्रकोप है। इसका इलाज दवाओं से नहीं दुआओं से होगा।

शून्य से 15 साल के बच्चों की बनेगी लिस्ट
हल्द्वानी। स्वास्थ्य विभाग यहां पर शून्य से 15 साल के बच्चों की लिस्ट बना रहा है। पता किया जाएगा कि किस बच्चे को सभी टीके लगे हैं या नहीं। साथ ही बच्चों का समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। अनुमान है कि यहां पर इस लिस्ट में 200 बच्चे शामिल हो सकते हैं।

बच्चों की मौत के सही कारण का पता लगाएंगे : एसीएमओ
हल्द्वानी। एसीएमओ डॉ. रश्मि पंत ने बताया कि बच्चों को दाने और बुखार आने की सूचना पिछले एक सप्ताह से आ रही है। यहां निकट ही आशा कार्यकत्रियां आती हैं और टीकाकरण किया जाता है। हमने यहां सभी घरों का निरीक्षण किया है। खसरे का डर तो नहीं है। लेकिन, बच्चों को घमोरियां हो रही हैं। हमने कुपोषित बच्चों को विटामिन ए की खुराक भी दी है। जिस परिवार में दो बच्चों की मौत हुई हम उस घर में भी गए हैं। पता चला है कि जिन बच्चों की मौत हुई है, उन्हें एक सप्ताह से बुखार और खांसी थी। जिन बच्चों की मौत हुई उनके सभी रिकॉर्ड देखे जाएंगे। उनमें एक बच्चे की मौत एसटीएच और दूसरे बच्चे की मौत घर पर ही हुई है। जिस बच्चे की मौत एसटीएच में हुई है उसके रिकॉर्ड देखे जाएंगे। हम नहीं चाहते यह बीमारी और बच्चों में भी फैले। साथ ही यहां बच्चों में कोविड वैक्सीन लगाए जाने को लेकर भी कैंप भी लगाए जाएंगे।

बहुत जगह ले गये पर जान नहीं बचा पाये
हल्द्वानी। जिस परिवार में बच्चे की मौत हुई वह महिला बच्चों के साथ मायके से आई थी। उसकी ससुराल राजपुरा में है। वह कुछ दिनों से यहीं गफूर बस्ती में है। बच्चों के नाना इंद्राज ने बताया कि जब बच्चों की तबीयत खराब हुई थी तो उन्हें लेकर पास के डॉक्टर के पास गए थे। लेकिन जब वहां भी इलाज नहीं मिला तो काठगोदाम में बच्चों को ओझा के पास ले गए। इसके बाद एक बच्चे को लेकर एक निजी अस्पताल और फिर सुशीला तिवारी अस्पताल गए। यहां छह साल के बच्चे ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

यहां टीकाकरण को लेकर काफी दिक्कतें आती हैं। माता-पिता को बहुत समझाना पड़ता है। जमीनी स्तर पर काम करने में काफी दिक्कते आतीं हैं। – सरीना

मैं यहां बच्चों को पढ़ाने का काम करती हूं। लोगों को अपने स्तर पर काफी जागरूक कर रहीं हूं। कुछ लोग समझ भी रहे हैं। – मोनिका सक्सेना