नैनीताल: कुमाऊं विवि के दीक्षांत में नहीं मिली वित्तीय अनियमितता

नैनीताल, अमृत विचार। उत्तराखंड हाइकोर्ट ने कुमाऊं विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले को सुनने के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए कहा कि कमेटी की जांच रिपोर्ट के अनुसार …
नैनीताल, अमृत विचार। उत्तराखंड हाइकोर्ट ने कुमाऊं विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले को सुनने के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए कहा कि कमेटी की जांच रिपोर्ट के अनुसार दीक्षांत समारोह में गड़बड़ियां नहीं पाई गई, इसलिए जनहित याचिका निस्तारित योग्य है।
मामले के अनुसार, नैनीताल निवासी गोपाल सिंह बिष्ट ने जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि कुमाऊं विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के दौरान सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। बुधवार को सुनवाई के दौरान मुख्य स्थायी अधिवक्ता सीएस रावत ने खंडपीठ को जानकारी दी कि कोर्ट के आदेश के क्रम में सरकार ने इसकी जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी गठित की थी।
कमेटी द्वारा जांच में किसी भी तरह की अनियमितता नहीं पाई गई, जो आरोप याचिकर्ता द्वारा लगाये गये, वे निराधार हैं। दीक्षांत समारोह के दौरान अचानक मौसम बदल गया था, जिसके लिए उसी समय वाटर प्रूफ टेंट की व्यवस्था की गई जिसके लिए टेंडर निकलना असंभव था। कॉफी मशीन का भी आरोप लगाया गया जो मेन्यू में छूट गया था। दीक्षांत समारोह में ऐसी कोई वित्तीय अनियमितता नहीं की गई। विपक्षी पार्टी ठेकेदार द्वारा कहा गया कि जनहित याचिका लंबित होने के कारण उनका अभी तक भुगतान नहीं किया गया, इसलिए मामले को शीघ्र निस्तारित की जाये।