राष्ट्र निर्माण के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए सामूहिक प्रयासों की जरुरत: पीएम मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र निर्माण के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर बल देते हुए रविवार को कहा कि भारत की ऐसी धारणा कभी नहीं रही कि सरकारें सब कुछ करेंगी। मोदी ने आज यहां अहिंसा यात्रा संपूर्ण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि, भारत में …
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र निर्माण के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर बल देते हुए रविवार को कहा कि भारत की ऐसी धारणा कभी नहीं रही कि सरकारें सब कुछ करेंगी। मोदी ने आज यहां अहिंसा यात्रा संपूर्ण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि, भारत में यह धारणा कभी नहीं रही कि सरकारें सब कुछ करेंगी अथवा जो सत्ता में हैं वही सब कुछ करेंगे। यह भारत का स्वभाव कभी नहीं रहा है।
हमारे देश में राजनीतिक , आध्यात्मिक और सामाजिक सभी अधिकारों की समान भूमिका रही है। देश में कर्तव्य हमारा धर्म रहा है।” प्रधानमंत्री ने तेरापंथ आचार्य महाश्रमणजी और उनके सभी शिष्यों को सात साल में ऐतिहासिक 18,000 किलोमीटर की यात्रा पूरी होने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि आचार्य महाश्रमणजी ने यात्रा के माध्यम से वसुधैव कुटुम्बकम के विचार का प्रचार किया तथा आचार्य महाश्रमणजी ने समाज में नैतिक मूल्यों के लिए काम किया है।
उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि लाखों लोग समाज को नशीले पदार्थों और इस तरह की अन्य बुराइयों से मुक्ति दिलाने के आचार्य जी के मिशन में शामिल हुए। मोदी ने कहा कि, आध्यात्मिक क्षेत्र में हम आत्म-साक्षात्कार तभी कर सकते हैं जब हम इस तरह के दोषों से मुक्त हों। जब हम स्वयं से ऊपर उठते हैं, तभी हमें बड़े अच्छे के लिए अपने कर्तव्यों का एहसास होता है। आचार्य महाश्रमण 11वें आचार्य एवं जैन श्वेतांबर तेरापंथ संप्रदाय के सर्वोच्च प्रमुख हैं।
उन्होंने 09 नवंबर 2014 को दिल्ली के लाल किले से अहिंसा यात्रा शुरू की जो आज संपन्न हुई। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने आचार्य तुलसी का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि, आचार्य तुलसी ने कहा था – मैं पहले इंसान हूं, फिर धार्मिक व्यक्ति हूं। फिर मैं साधना करने वाला जैन साधु हूं। उसके बाद मैं तेरापंथ का आचार्य हूं।
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