मुरादाबाद : सपा-भाजपा को हार जीत की चिंता, बसपा-कांग्रेस के लिए खोने को नहीं है कुछ

विनोद श्रीवास्तव/अमृत विचार। वर्ष 2017 के खट्टे-मीठे अनुभवों को देखते हुए इस बार समाजवादी पार्टी और भाजपा के प्रत्याशियों और दलों के दिग्गजों को हार जीत की चिंता है। कांग्रेस और बसपा के लिए खोने को कुछ नहीं है। मुरादाबाद मंडल की 27 सीटों में पिछली बार 14 सीटों पर कमल खिला था तो 13 …
विनोद श्रीवास्तव/अमृत विचार। वर्ष 2017 के खट्टे-मीठे अनुभवों को देखते हुए इस बार समाजवादी पार्टी और भाजपा के प्रत्याशियों और दलों के दिग्गजों को हार जीत की चिंता है। कांग्रेस और बसपा के लिए खोने को कुछ नहीं है। मुरादाबाद मंडल की 27 सीटों में पिछली बार 14 सीटों पर कमल खिला था तो 13 सीट पर समाजवादी पार्टी की साईकिल दौड़ी थी। बाद में रामपुर के स्वार से आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम की विधायकी रद होने से यह आंकड़ा 14-12 का रह गया था। मंडल में कहीं भी बसपा और कांग्रेस दमदारी से खड़ी नहीं हो पाई थी। कमोवेश यही स्थिति 2022 के विधानसभा चुनाव में भी है। हर सीट पर भाजपा और सपा में आमने सामने की टक्कर पश्चिम की इस बेल्ट में देखने को मिल रहा है।
मुरादाबाद जिले की बात करें तो 2017 में यहां छह सीटों पर समाजवादी पार्टी ने चार पर कब्जा किया था। केवल मुरादाबाद नगर और कांठ में भाजपा प्रत्याशी बड़ी मुश्किल से जीत कर पार्टी की लाज रख पाये थे। भाजपा के यह दोनों विधायक शहर और कांठ में हारते-हारते मामूली अंतर से जीते थे। जिसके चलते इस बार नैया को पार लगने में भाजपा के कई दिग्गज भले ही दंभ भर रहे हों लेकिन सपा के जोर से यह सीटें भी असमंजस के भंवर में फंसती दिख रही है।
मुरादाबाद जिले में इस चुनाव में छह सीटों पर जीत का दावा सपा और भाजपा दोनों कर रहे हैं। भाजपा के रणनीतिकारों की बात सच निकली तो उनके आंतरिक सर्वे में सभी छह सीटों पर खुद ही हार मान लिया गया है। ऐसे में ईवीएम से निकले वोट क्या नई इबारत लिखेंगे या सपा की साइकिल की चाल से विरोधी मुरादाबाद में चारों खाने चित्त हो जाएंगे यह तो दस मार्च की दोपहर बाद तक पूरी तस्वीर साफ होने पर ही कहा जा सकता है।
कांग्रेस को पिछली बार नहीं मिली थी एक भी सीट
2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपने बूते चुनाव लड़ी थी तब भी पार्टी को मुरादाबाद जिले में एक भी सीट नसीब नहीं हुई थी। पार्टी की ओर से जिले की आखिरी निर्वाचित विधायक 1984-85 में पुष्पा सिंघल ने नगर सीट जीत कर झोली में डाली थी। तबसे लेकर आज तक कांग्रेस का पंजा मुरादाबाद में विधानसभा चुनाव में कभी नहीं टिक पाया।
एग्जिट पोल की चर्चा से सबको बेचैनी
विभिन्न एक्जिट पोल पर दिखाए जा रहे आंकड़ों से हर दल में बेचैनी है। जिसकी जीत दिखाई जा रही है, वह तो इसे शिरोधार्य कर रहा है। जिसके खाते में हार का ठीकरा फोड़ा जा रहा है, वह सिरे से नकार कर एक्जिट पोल को झूठा बताने में लगा है। ऊंट किस करवट वाकई बैठा है इसके लिए इंतजार की घड़ियां खत्म होने को है। चंद घंटे बाद जब ईवीएम का लाक खुलेगा तो अलाद्दीन के चिराग से कौन सा जिन्न निकलेगा यह देखने वाली बात होगी।
2017 में विस चुनाव में मंडल में जीते प्रत्याशी
मुरादाबाद: मुरादाबाद नगर भाजपा -रितेश गुप्ता, मुरादाबाद ग्रामीण-सपा-हाजी इकराम कुरैशी, कांठ-भाजपा-राजेश कुमार उर्फ चुन्नू, कुंदरकी आंशिक-सपा-हाजी रिजवान, ठाकुरद्वारा-सपा-नवाज जान खां, बिलारी-सपा-मोहम्मद फहीम
रामपुर: रामपुर नगर-सपा-तंजीन फातिमा, चमरौआ-सपा-नसीर अहमद खां, विलासपुर-भाजपा-सरदार बलदेव सिंह औलख, स्वार-सपा-अब्दुल्ला आजम निर्वाचन रद्द, मिलक-भाजपा-राजबाला
अमरोहा: हसनपुर-भाजपा-महेंद्र सिंह खड़गवंशी, अमरोहा-सपा-महबूब अली, अमरोहा नौगांवा सादात-भाजपा-संगीता चौहान, धनौरा-भाजपा-राजीव कुमार,
बिजनौर: बिजनौर-भाजपा-सुचि चौधरी, नगीना-सपा-मनोज पारस, चांदपुर-भाजपा-कमलेश सैनी, नजीबाबाद-सपा-तस्लीम अहमद, बढ़ापुर-भाजपा-सुशांत सिंह, नूरपुर-सपा-नईमुल हसन, नहटौर-भाजपा-ओम कुमार, धामपुर-भाजपा-अशोक राणा
संभल: गुन्नौर-भाजपा-अजीत कुमार उर्फ राजू, संभल-सपा-इकबाल महमूद, असमौली-सपा-पिंकी यादव, चंदौसी-भाजपा-गुलाबो देवी
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