बरेली: एक तरफ कुपोषण से लड़ने की योजनाएं, दूसरी चार माह से पुष्टाहार तक नहीं बंटा

बरेली, अमृत विचार। बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग तमाम योजनाएं चला रहा है लेकिन कुपोषण खत्म नहीं हो रहा है। इस बार तो कुपोषण के खिलाफ चल रही लड़ाई में शासन स्तर से ही ढील बरती जा रही है। आलम यह है कि नौनिहालों को अभी तक मई का …
बरेली, अमृत विचार। बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग तमाम योजनाएं चला रहा है लेकिन कुपोषण खत्म नहीं हो रहा है। इस बार तो कुपोषण के खिलाफ चल रही लड़ाई में शासन स्तर से ही ढील बरती जा रही है। आलम यह है कि नौनिहालों को अभी तक मई का ही पोषाहार बांटा गया है। जो बच्चा अगस्त में कुपोषित मिला, उसे करीब दो महीने बाद खाद्यान्न मिलेगा।
जिले में कुल 2857 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें तीन लाख से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। सरकार की तरफ से पंजीकृत बच्चों के अलावा महिलाओं, किशोरियों को हर महीने गेहूं, चावल बांटे जाते हैं। नई व्यवस्था में अब चावल कोटेदार के माध्यम से बांटा जा रहा है। शासन की मंशा है कि इनसे मिलने वाले अतिरिक्त पोषण से बच्चों का स्वास्थ्य ठीक होगा।
हर महीने आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों का वजन किया जाता है। उसी के अनुसार अगले महीने बच्चों को पोषाहार का खाद्यान्न दिया जाता है। जिले में हर महीने ढाई हजार क्विंटल चावल, तीन हजार क्विंटल के करीब गेहूं, दो हजार क्विंटल से अधिक दाल और रिफाइंड ऑयल बांटा जाता है। शासनादेश के अनुसार हर महीने पात्रों को यह राशन मिलना चाहिए लेकिन शासन की ओर से ही बांटने के लिए पोषाहार का खाद्यान्न इस बार समय से नहीं मिल रहा है। जानकारी के मुताबिक अब तक पात्रों को केवल मई तक का ही खाद्यान्न बांटा गया है, जबकि सितंबर का पहला सप्ताह आज खत्म हो जाएगा।
इतना मिलता है पोषाहार
छह महीने से तीन साल तक के बच्चों को एक-एक किग्रा गेहूं, दाल व चावल, 455 ग्राम तेल, तीन से छह साल तक के बच्चे को 500-500 ग्राम चावल, गेहूं, दाल, गर्भवती व धात्री महिलाओं को एक-एक किग्रा चावल व दाल, डेढ़ किग्रा गेहूं व 455 ग्राम तेल, अतिकुपोषित बच्चों को डेढ़-डेढ़ किग्रा चावल व गेहूं, दो किग्रा दाल, 455 ग्राम तेल, 11 से 14 साल तक किशोरियों को एक-एक किग्रा चावल व दाल, डेढ़ किग्रा गेहूं और 355 ग्राम तेल दिया जाता है। उप निदेशक/जिला कार्यक्रम अधिकारी डा. आरबी सिंह के अनुसार कुपोषण के खिलाफ जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। शासन की योजनाओं का लाभ पात्रों को दिया जा रहा है।