देवबंद: जमीयत की बैठक का आज दूसरा दिन, मौलाना मदनी बोले- शरीयत में दखल नहीं करेंगे बर्दाश्त, हमारे वजूद का सवाल

देवबंद: जमीयत की बैठक का आज दूसरा दिन, मौलाना मदनी बोले- शरीयत में दखल नहीं करेंगे बर्दाश्त, हमारे वजूद का सवाल

देवबंद। यूपी के देवबंद में 28 मई से जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने दो दिन का प्रोग्राम आयोजित किया था, जिसमें शामिल होने के लिए अलग-अलग संगठनों के प्रतिनिधि पहुंचे हुए हैं। आज जलसा का दूसरा दिन है। सम्मेलन के पहले दिन देश भर से शामिल हुए मुस्लमानों ने कई मामले को लेकर अलग-अलग प्रस्ताव रखे जिन …

देवबंद। यूपी के देवबंद में 28 मई से जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने दो दिन का प्रोग्राम आयोजित किया था, जिसमें शामिल होने के लिए अलग-अलग संगठनों के प्रतिनिधि पहुंचे हुए हैं। आज जलसा का दूसरा दिन है। सम्मेलन के पहले दिन देश भर से शामिल हुए मुस्लमानों ने कई मामले को लेकर अलग-अलग प्रस्ताव रखे जिन पर बात की गई। वहीं, आज होने वाली बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया जाएगा।

इस दौरान जमीयत की तरफ से कई तरह के प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई, जिनमें ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा शाही ईदगाह जैसे मामले भी शामिल हैं। सम्मेलन के दूसरे दिन भी जमीयत के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि, हर चीज पर समझौता हो सकता है लेकिन विचारधारा पर समझौता नहीं हो सकता है। मदनी ने कहा कि शरीयत में दखल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

हमें पहले मुल्क बचाना है – मदनी

मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि, आज हमारे वजूद का सवाल है। मुसलमानों को पहले से ही जुल्म सहने की आदत है। हमें पहले मुल्क बचाना है। इसीलिए हम मुल्क की बात पहले कर रहे हैं, लेकिन इससे भी बहुत सारे लोगों के पेट में दर्द हो रहा है। अगर वो राष्ट्रवाद की बात करते हैं तो वो सही है, लेकिन अगर हम ये बात करेंगे तो उसे दिखावा कहा जाता है। अगर इस मुल्क की हिफाजत के लिए हमारी जान जाएगी तो हमारे लिए सौभाग्य की बात होगी।

‘आप करते हैं डराने का काम’

उन्होंने अपने संबोधन ने कहा कि, हमारे लहजे में इन्हें नफरत कहां से नजर आ रही है। हम डराते नहीं हैं आप डराने का काम करते हैं। हम गैर नहीं हैं, हम इस मुल्क के हैं, ये हमारा मुल्क है। हम अपने मुल्क के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। हमारी तहजीब, खाने-पीने के तरीके अलग हैं… अगर तुमको हमारा मजहब बर्दाश्त नहीं है तो तुम कहीं और चले जाओ। वो जरा-जरा सी बात पर कहते हैं कि पाकिस्तान चले जाओ। हमें तो मौका मिला था, लेकिन हमने उसे रिजेक्ट कर दिया।

मदनी ने कहा कि, हमने ऋषिकेश से लेकर दिल्ली तक हजारों पेड़ लगाए थे। मंदिरों, मस्जिदों और स्कूलों में पेड़ लगाए गए थे। हमें इस बरसात में ऐसा ही अभियान चलाना है। लोग बोलेंगे, लिखेंगे… लेकिन इसकी परवाह मत करिए। उन्होंने आगे कहा कि, हम लोग बहुत लंबे अरसे के बाद यहां मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मुसलमानों का चलना तक मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि, हमें हमारे ही देश में अजनबी बना दिया गया है। लेकिन जो एक्शन प्लान वो लोग तैयार कर रहे हैं, उस पर हमें नहीं चलना है। उन्होंने कहा कि हम आग को आग से नहीं बुझा सकते हैं। नफरत को प्यार से हराना होगा।

जमीयत-उलेमा-हिंद के दोनों गुट एक हो जाएंगे- मौलाना अरशद मदनी

वहीं, देर शाम आठ बजे दोबार दूसरी बैठक हुई। इस बैठक में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख और दारुल उलूम देवबंद सदर उल मुदर्रिसीन मौलाना सैयद अरशद मदनी शामिल हुए। इस दौरान पंडाल में पहुंचने पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष व पूर्व सांसद मौलाना महमूद मदनी ने मौलाना अरशद मदनी का भव्य स्वागत किया। मौलाना सैयद अरशद मदनी ने संबोधित करते हुए कहा कि, “अल्लाह करे ये इजलास जमीयत उलमा-हिंद को एक करने का सबब बन जाए।”

कानूनी और संवैधानिक लड़ाई लड़ी है

उन्होंने कहा कि, मुसलमानों के दिलों की आवाज से हमें यकीन है कि वह दिन दूर नहीं है जब जमीयत-उलेमा-हिंद के दोनों गुट एक हो जाएंगे। उन्होंने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के बुजुर्गों की जिंदगी के मकसद पर रोशनी डाली और कहा कि दोनों समाझौतों का एक ही मकसद है। आने वाले दिन आप लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी होगी और हमें उम्मीद है कि जमीयत उलमा हिंद एक प्लेटफार्म से हालात का मुकाबला करेगी। उन्होंने आगे कहा कि, हमारे उलेमा ने देश की आजादी से लेकर बाबरी मस्जिद जैसे मुद्दों के लिए बड़ी कुर्बानियां दी हैं और कानूनी और संवैधानिक लड़ाई लड़ी है। हमारे बुजुर्ग कभी सड़कों पर नहीं उतरे लेकिन उन्होंने देश के संवैधानिक तरीकों से लड़ाई लड़ी है। हमें भी उसी तरीके से हालात का मुकाबला करना है अगर ऐसा ना हुआ तो हम नाकाम हो जाएंगे।

यह देश हमारा है- मौलाना अरशद मदनी

मौलाना अरशद मदनी ने आगे कहा कि, हम कही बाहर से नहीं आए हैं बल्कि यह देश हमारा है और हम यही के ही हैं। उन्होंने कहा कि यह बदकिस्मती है कि देश का बहुसंख्यक समाज नफरत का शिकार हो गया है और सत्ता में बैठे लोग धर्म के नाम पर देश के लोगों को नफरतों में बांट रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के हालात बिगड़ रहे हैं लेकिन सत्ता में बैठे लोगों की जुबान बंद है। हमें धर्म से ऊपर उठ कर इस्लाम धर्म के इंसानियत के संदेश को आगे बढ़ाना है अगर हम ऐसा करेंगे तो इंशाल्लाह हालात जरूर बदलेंगे।

धर्म के नाम पर लोग सड़कों पर आएं

मौलाना मदनी ने कहा कि हमें बहुसंख्यक समाज के लोगों से नजदीकियां बढ़ानी चाहिए और प्यार मोहब्बत के साथ हालात का मुकाबला करते हुए उन्हें अपने मदरसों और अपने स्कूलों के शिक्षा के निजाम के बारे में समझाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों की चाहते हैं कि धर्म के नाम पर लोग सड़कों पर आएं और एक-दूसरे से भिड़े, अगर मुसलमान हालात को नहीं समझते हैं और सड़कों पर निकलते हैं तो वह भी सप्रदायिक ताकतों को मजबूत करने वाले होंगे।

उन्होंने कहा कि, हमें बहुसंख्यक समाज के लोगों से नजदीकियां बढ़ानी चाहिए और प्यार मोहब्बत के साथ हालात का मुकाबला करते हुए उन्हें अपने मदरसों और अपने स्कूलों के शिक्षा के निजाम के बारे में समझाना चाहिए।

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