गृह मंत्रालय की लैबों में फोन हैक करने व स्पाइवेयर स्रोत खोजने की क्षमता

गृह मंत्रालय की लैबों में फोन हैक करने व स्पाइवेयर स्रोत खोजने की क्षमता

संजय सिंह, नई दिल्ली, अमृत विचार। गृह मंत्रालय के साइबर सिक्योरिटी सेल ने पिछले एक-डेढ़ वर्ष के दौरान ऐसी उन्नत सुविधाएं स्थापित की हैं जिनसे न केवल किसी का मोबाइक फोन हैक किया जा सकता है, बल्कि मालवेयर या स्पाइवेयर के दूरस्थ स्रोत का पता भी लगाया जा सकता है। पेगासस स्पाइवेयर जासूसी कांड उजागर …

संजय सिंह, नई दिल्ली, अमृत विचार। गृह मंत्रालय के साइबर सिक्योरिटी सेल ने पिछले एक-डेढ़ वर्ष के दौरान ऐसी उन्नत सुविधाएं स्थापित की हैं जिनसे न केवल किसी का मोबाइक फोन हैक किया जा सकता है, बल्कि मालवेयर या स्पाइवेयर के दूरस्थ स्रोत का पता भी लगाया जा सकता है।

पेगासस स्पाइवेयर जासूसी कांड उजागर होने के बाद से देश भर में साइबर सिक्योरिटी व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। और गृह मंत्रालय विपक्ष के निशाने पर है। कांग्रेस ने गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की है। जबकि सरकार आइटी मंत्रालय के जरिये अपना बचाव करने की कोशिश कर रही है। इससे विपक्ष भड़का हुआ है और यही वजह है कि वो आइटी मंत्री अश्विनी वैष्णव को सुनने को तैयार नहीं है।

तृणमूल के राज्यसभा सांसद शान्तनु सेन के निलंबन के रूप में इसकी कीमत भी उसे चुकानी पड़ी है। परंतु विपक्षी दल अड़े हुए हैं और संसद की कार्यवाही को बाधित कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक स्वयं शाह या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आकर बयान नहीं देते वे संसद नहीं चलने देंगे।

साइबर सिक्योरिटी या साइबर सुरक्षा का संबंध इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल माध्यम से किसी भी कानूनसम्मत डेटा अथवा संवाद के सुरक्षित आदान-प्रदान और भंडारण से है। इसमें किसी भी तरह की अनधिकृत सेंध, घुसपैठ, छेड़छाड़, मिलावट अथवा चोरी साइबर सुरक्षा में कमी को दर्शाता है।

सरकार पर आरोप है कि उसने या तो खुद इस इजराइली स्पाइवेयर का इस्तेमाल कर चुनिंदा लोगों की जासूसी करवाई। अथवा किसी बाहरी व्यक्ति अथवा संस्था ने अनधिकृत रूप से ये काम किया। दोनों ही स्थितियों में सरकार की जवाबदेही बनती है। चूंकि साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की है, आइटी मंत्रालय महज मददगार की भूमिका निभाता है, इसलिए विपक्षी सवालों का रुख गृह मंत्रालय की ओर है।

दरअसल, साइबर सुरक्षा को लेकर गृह मंत्रालय ने हाल के वर्षों में कुछ नए कदम उठाए हैं। इनमें सबसे प्रमुख कदम नेशनल साइबर फोरेंसिक लैबोरेटरी (एनएसएफएल) को मजबूत व आधुनिक बनाने का है। इस राष्ट्रीय लैब के तहत कई शाखा लैब काम करती हैं। जिनमें इमेज एंड वीडियो एन्हांसमेंट लैब, मालवेयर फोरेंसिक लैब, क्रिप्टो करेंसी एनालिटिक्स लैब तथा ऑनलाइन मेमोरी एंड मोबाइल फोन फोरेंसिक लैब प्रमुख हैं।

इनमें इमेज एंड वीडियो एन्हांसमेंट लैब का काम खराब क्वालिटी के फोटो व वीडियो की क्वालिटी को उन्नत कर देखने लायक बनाना है। लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकसित इस लैब की मदद से संदिग्ध अपराधी, आतंकी, वाहन आदि की पहचान कर उसे पकड़ा जा सकता है। ये लैब पिछले वर्ष मार्च से काम करना शुरू कर दिया था। इसी प्रकार क्रिप्टो करेंसी एनालिटिक्स लैब की स्थापना क्रिप्टो करेंसी, क्रिप्टो वालेट एवं क्रिप्टो एक्सचेंज, टम्बलर, लिंक्ड आईपी आदि के लेनदेन को ट्रैक करने के लिए की गई है। करीब 80 लाख की लागत से तैयार ये लैब मार्च, 2020 से काम कर रही है।

परंतु पेगासस केस के संदर्भ में मालवेयर फोरेंसिक लैब तथा ऑनलाइन मेमोरी एंड मोबाइल फोन फोरेंसिक लैब विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। इनमें मालवेयर लैब में दो भिन्न प्रकार के ऐसे नए टूल्स स्थापित किए गए हैं जो किसी भी तरह के शरारती एप्लिकेशन, कोड अथवा यूआरएल का विश्लेषण के मालवेयर या स्पाइवेयर के स्रोत का पता लगा सकते हैं। लगभग 4 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस उन्नत लैब ने पिछले साल जून से काम करना शुरू कर दिया था।

इसके बाद महत्वपूर्ण है ऑनलाइन मेमोरी एंड मोबाइल फोन फोरेंसिक लैब। इस लैब को 14.5 करोड़ रुपये की लागत से खरीदा गया है। ये खरीदारी किस कंपनी से की गई इस बात की जानकारी मंत्रालय ने नहीं दी है। लेकिन इतना अवश्य बताया है कि सरकार की ओर से नवंबर, 2020 में इसकी मंजूरी दी गई थी और मार्च, 2021 से इसने कार्य करना प्रारंभ कर दिया है। इस लैब की मदद से जांच अधिकारी किसी दूरस्थ स्थान पर स्थित फोरेंसिक टूल तक अपनी पहुंच बना सकता है और उसमें दर्ज ब्यौरे को हासिल कर सकता है।

इन दो लैब की मदद से गृह मंत्रालय न केवल किसी भी मालवेयर या स्पाइवेयर का पता लगा सकता है। बल्कि किसी के भी मोबाइल फोन को हैक कर बातचीत सुन सकता है। ऐसे में गृह मंत्रालय अपनी जवाबदेही से पल्ला नहीं झाड़ सकता। या तो उसे स्पष्ट करना चाहिए कि कथित नेताओं, अफसरों, जजों आदि के फोन टैप करने में इन लैब का उपयोग नहीं किया गया है। अथवा इस बात का पता लगाकर संसद को बताना चाहिए कि किस बाहरी एजेंसी का इसमें हाथ है। जब तक ऐसा नहीं होता, अंगुलियां उठती रहेंगी।

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