बरेली: बीडीए से कॉलोनी पास कराने के नाम पर खेल कर रहे कॉलोनाइजर

बरेली,अमृत विचार। तमाम कॉलोनाइजर बीडीए से स्वीकृत कॉलोनी के नाम पर फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। कई जगहों पर ऐसी कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं जिनका कुछ ले-आउट तो बीडीए से पास होता है बाकी हिस्सा स्वीकृत नहीं होता। इसके बावजूद पूरी कॉलोनी को बीडीए से स्वीकृत दिखाकर गड़बड़ी की जा रही है। इस खेल …
बरेली,अमृत विचार। तमाम कॉलोनाइजर बीडीए से स्वीकृत कॉलोनी के नाम पर फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। कई जगहों पर ऐसी कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं जिनका कुछ ले-आउट तो बीडीए से पास होता है बाकी हिस्सा स्वीकृत नहीं होता। इसके बावजूद पूरी कॉलोनी को बीडीए से स्वीकृत दिखाकर गड़बड़ी की जा रही है।
इस खेल के पीछे मकसद कॉलोनाइजर से प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से वसूल होने वाले विकास शुल्क की मोटी रकम को बचाना होता है। इसमें बीडीए और बिल्डरों की साठगांठ से भी इंकार नहीं किया सकता। इससे बीडीए की वसूली को तो चपत लग ही रही है। साथ ही ऐसी कॉलोनियों में प्लॉट या भवन खरीदने वालों को मानकों के अनुसार होने वाले विकास की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है।
राजेंद्रनगर, पीलीभीत बाईपास, सिविल लाइंस, नैनीताल रोड सहित कई जगहों पर कॉलोनाइजरों ने कॉलोनी विकसित करने के नाम पर यह गड़बड़ी की है। उन्होंने कॉलोनी को बीडीए से स्वीकृत बताकर प्लॉट व भवनों के निर्माण तो करा लिए लेकिन कॉलोनी का एक हिस्सा बीडीए से पास ही नहीं है।
इस फर्जीवाड़े के पीछे यह बताया जा रहा है कि बीडीए से स्वीकृत कराकर कॉलोनी विकसित करने के लिए बीडीए बिल्डरों से 1200 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से विकास शुल्क वसूल करता है। ऐसे में कॉलोनी को विकसित करने के लिए बीडीए को विकास शुल्क के नाम पर मोटी रकम देनी पड़ती है। साथ ही बिल्डर को बीडीए के मानकों के आधार पर बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध करानी होती हैं। ऐसे में बिल्डरों को कॉलोनी विकसित करने के लिए काफी रकम खर्च करनी पड़ती है।
ऐसे में प्लॉटों की कीमत भी काफी बढ़ जाती है। इसलिए विकास शुल्क को बचाने के लिए कॉलोनाइजर अपनी विकसित की जा रही कॉलोनी का पूरा ले-लाउट के बजाय कुछ हिस्सा ही पास करा लेते हैं। स्वीकृत कराने वाले हिस्से में ही उन्हें विकास करना होता है जबकि उसी से जुड़ा कुछ भू-भाग बीडीए से स्वीकृत नहीं होता। इसे जांच में पकड़ पाना आसान नहीं होता। बीडीए के अधिकारी भी इस गड़बड़ी पर शिकंजा कसने के बजाय मिलीभगत से पूरा मामला दबा देते हैं।
कई नामचीन बिल्डर भी इस खेल में शामिल
शहर के कई नामचीन बिल्डर भी कॉलोनी का पूरा ले-आउट बीडीए से स्वीकृत न कराकर विकास शुल्क की बड़ी रकम बचाने का खेल कर रहे हैं। बीडीए के अधिकारियों ने कुछ दिन पहले ही नैनीताल रोड पर विकसित की जा रही एक बड़े बिल्डर की कॉलोनी में भी यह गड़बड़ी पकड़ी थी। वह जिस कॉलोनी को बीडीए से स्वीकृत बता रहे हैं, उस कॉलोनी के आगे के हिस्से का करीब 1200 वर्गमीटर हिस्सा बीडीए से पास ही नहीं था। इसी तरह वीरसावरकर नगर, राजेंद्रनगर, पीलीभीत बाईपास, सीबीगंज सहित शहर के कई हिस्सों में ऐसी कॉलोनी धड़ाधड़ विकसित हो रही हैं। ऐसी कॉलोनी का पूरा ले-आउट बीडीए से पास है? इसकी कोई गारंटी नहीं।
जमानत के तौर पर बीडीए अपने पास रखता है कुछ प्लॉट
बीडीए जिन कॉलोनियों को विकसित करने की स्वीकृति देता है वहां मानकों के आधार पर विकास कार्य होने चाहिए। कॉलोनी पास करते समय बीडीए वहां के कुछ प्लॉट जमानत के तौर पर अपने पास रखता है। बिल्डर अगर मानकों के अनुरूप विकास कार्य नहीं कराता है तो बीडीए ऐसे प्लॉटों की बिक्री करके भरपाई करता है और कॉलोनी में विकास कार्य पूरे कराता है। हालांकि इसका अनुपालन नहीं हो रहा है। विकल्प के तौर पर कॉलोनाइजर से जमानत धनराशि भी जमा कराने का प्रावधान है।
“यह सही है कि कुछ कॉलोनाइजर बीडीए से कॉलोनी का पूरा ले-आउट पास नहीं करा रहे हैं। इससे कॉलोनी में मानक के अनुसार विकास भी नहीं हो पा रहा है। इसकी सूचना मिलने पर कार्रवाई भी की जाती है।” -राजीव दीक्षित, अधीक्षण अभियंता, बीडीए