World TB Day; हमने नहीं छोड़ी दवा, टीबी को कर दिया दफा; टीबी चैंपियन संभावित मरीजों को कर रहे जागरूक...
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कानपुर, अमृत विचार। 15 दिन से खांसी है, बुखार भी। जांच से क्यों डर रहे हो, अरे आप मुझे देखो, टीबी हुई थी, उसकी दवा खाई और पौष्टिक आहार भी लिया। अब तुम्हारे सामने हूं, पूरी तरह से ठीक हूं और टीबी से मुक्ति पा चुका हूं। ऐसी बातें बोलकर टीबी चैंपियन संभावित मरीजों को जागरूक करने के साथ ही टीबी मरीजों को समय पर जांच व दवा के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं।
लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2025 तक पूरे देश को टीबी मुक्त कराने का लक्ष्य रखा गया है, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प भी है। जिले में 20 हजार से अधिक टीबी रोगी हैं और 700 के करीब एमडीआर के मरीज हैं। इन आंकड़ों को कम करने, टीबी मरीजों को जांच, दवा व पौष्टिक आहार का सेवन नियम से कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सौ दिवसीय अभियान का संचालन किया जा रहा है।
अभियान में संभावित मरीज भी चिह्नित कर उनकी जांच कराई जा रही है, जिसमे टीबी चैंपियन भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। टीबी चैंपियन अपने आप का उदाहरण देकर टीबी ग्रस्त मरीजों व संभावित मरीजों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। उनको अभियान में कुछ केस ऐसे भी मिले हैं, जिन्हें लक्षणों के आधार पर टीबी की आशंका थी, लेकिन वह जांच से झिझक रहे थे। पूछताछ में उन्होंने टीबी ठीक न होने, दवाओं के दुष्प्रभाव, समाज में अलग-थलग करने का डर आदि बताया। जानकारी होने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम व टीबी चैंपियनों ने ऐसे मरीजों को भावनात्मक सहयोग प्रदान कर उनका इलाज शुरू कराया।
वर्ष 2023-24 में मिले थे 26,222 मरीज
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुबोध प्रकाश ने बताया कि वर्ष 2023-24 में 26,222 टीबी के रोगी मिले थे, इनमें से 80 से 90 फीसदी मरीज ठीक हो चुके हैं। जिन्होंने किसी कारण इलाज व दवा में लापरवाही बरती वह आज भी बीमारी से ग्रस्त हैं, जिनका इलाज स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में किया जा रहा है। टीबी के इलाज में लापरवाही नुकसानदायक साबित हो सकती है।
टीबी ही नहीं एमडीआर को भी दी मात
बाबूपुरवा निवासी नसीम बनों का कहना है कि टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है। समय पर सही उपचार से यह पूरी तरह ठीक हो सकती है। स्वस्थ होने पर स्वास्थ्य विभाग ने उनको टीबी चैंपियन बनाया। अब वह लोगों को टीबी के प्रति जागरूक कर रही हैं। इसी तरह मछरिया निवासी शबनूर एमडीआर टीबी को मात देकर स्कूल व क्षेत्रों में जाकर लोगों को टीबी के प्रति जागरूक व लक्षण मिलने पर जांच कराने की सलाह दे रही हैं।
केस-1
शिवाला निवासी दुर्गा सिंह ने बताया कि खांसी ठीक नहीं होने पर जांच कराई तो टीबी की पुष्टि हुई। छह महीने तक इलाज चला, दवाएं रामबाण निकलीं। नियमित दवाओं के सेवन से बीमारी पूरी तरह से ठीक हुई।
केस-2
कल्यानपुर निवासी शिवप्रसाद ने बताया कि लंबे समय से खासी बंद नहीं हो रही थी और बुखार भी आता था। जांच में टीबी निकली। डर के कारण परिजनों को भी नहीं बताया। छह महीने लगातार दवा खाई और टीबी से मुक्ति पाई।