हल्द्वानी: काले सोने ने कर दिया था कंगाल, ई-बुक ने मनोज को बनाया मालामाल

सर्वेश तिवारी, हल्द्वानी, अमृत विचार। शहर के सट्टा किंग बन चुके मनोज गुप्ता ने बड़ा आदमी बनने के लिए बहुत हाथ-पैर चलाए, लेकिन हमेशा गलत रास्ता चुना। इसका खामियाजा भी उसे भुगतना पड़ा और जल्द अमीर बनने की चाह उसे जेल की सलाखों के पीछे तक ले गई, लेकिन वह सुधरा नहीं। बल्कि जेल जाने के बाद उसने एक और गलत रास्ता चुना। इस बार उसका दांव सही तो पड़ा, लेकिन जेल फिर से उसका ठिकाना बन गई।
रामपुर रोड गली नंबर 9 में रहने वाले मनोज गुप्ता ने आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए करीब 8 साल पहले चरस का धंधा शुरू किया था। पहाड़ से आने वाली चरस की छोटी-छोटी खेप खरीदकर मनोज उसे फुटकर में बेचने लगा, लेकिन हर किसी से चरस की डीलिंग उसे भारी पड़ गई।
चरस के धंधे की भनक पुलिस को लग गई और वर्ष 2020 में वह बनभूलपुरा पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस ने उसे चरस के साथ रंगेहाथ गिरफ्तार किया और न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया। बताया जाता है कि जेल में उसकी मुलाकात कुछ सटोरियों से हुई। सटोरियों से उसने सट्टे का कारोबार सिखाया और जेल से निकलने के बाद चरस के व्यापार से तौबा कर उसने सट्टा पर्ची का धंधा शुरू कर दिया। हालांकि ये काम भी जोखिम भरा था, लेकिन कमाई हो रही थी।
इसी बीच राष्ट्रीय स्तर पर चलने वाले कुछ बेटिंग ऐप ने उसे नया आइडिया सुझाया। उसने इस धंधे की बारीकियां भी सीखी और दिल्ली में रहने वाले अंकित मक्कड़ के संपर्क में आया। अंकित उसे 9 हजार रुपये में बेटिंग असिस्टेंड ई-बुक एप बेचा। मनोज पहले जिन लोगों को सट्टा पर्ची खिलाता था, उन्हीं लोगों को ऑनलाइन सट्टे के कारोबार का हिस्सा बना लिया। एक वक्त यह आया कि इस ऐप में लिमिट बनवाने के लिए लोग हजारों और लाखों रुपये मनोज को देने लगे। महज पांच साल में मनोज ने ऑनलाइन बेटिंग ऐप को न सिर्फ पूरे उत्तराखंड में फैला दिया, बल्कि अपने जैसे और बेटिंग ऐप चलाने वालों को भी साथ जोड़ लिया।
सिर्फ एक मैच में दांव पर लग गए थे 19 लाख रुपये
पुलिस ने बताया कि मनोज लोगों को ग्राहक बनाने के लिए पहले उनकी लिमिट बनाता था। यह लिमिट ऐप में बनाई जाती थी और इसका पैसा कैश लिया जाता था। शनिवार को जब पुलिस ने मनोज के घर पर दबिश दी तो श्रीलंका और बांग्लादेश के बीच क्रिकेट मैच चल रहा था। पुलिस ने मौके से 15 लाख बरामद किए, लेकिन इस मैच पर 19 लाख रुपये से अधिक दांव पर लगे थे। ये छोटा मैच था और इसके बावजूद सिर्फ एक ही मैच में इतनी बड़ी रकम दांव पर लग गई थी।
सट्टे के कारोबार से जुड़े हैं कई रसूखदारों के नाम
पुलिस ने मौके से मिले लैपटॉप और कुछ रजिस्टर को अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि बरामद रजिस्टर में दो सौ से अधिक लोगों के नाम और मोबाइल नंबर दर्ज हैं। यह वह लोग हैं जो मनोज गुप्ता के नियमित ग्राहक हैं और लगभग सभी मैच पर सट्टा लगाते हैं। पुलिस रजिस्टर और लैपटॉप खंगाल रही है, लेकिन माना जा रहा है कि मनोज ने सट्टा कारोबार का नेटवर्क पूरे उत्तराखंड में फैला लिया था। इसमें कुछ बड़े नाम सामने आने की उम्मीद है।
सफेदपोशों में पैठ, रह चुका है एसोसिएशन का अध्यक्ष
मनोज की सफेदपोश लोगों में अच्छी खासी पैठ है। हाल ही में वह कुछ सफेदपोशों के कार्यक्रम में बुलाया गया और उसने सफेदपोशों के साथ फोटो भी खिंचवाई। जानकारी यह भी मिली है कि मनोज के प्रभाव को देखते हुए उसे कुछ समय पहले परिवहन से जुड़ी एक एसोसिशएन का अध्यक्ष भी बनाया गया था। मनोज के मोबाइल में कुछ नंबर मिले हैं जो मनोज की तरह सट्टा लगवाते हैं और मनोज इनके ऐप के जरिये भी लोगों के पैसे लगवाता था।
आई बुक ऐप बेचने वाला दिल्ली का अंकित राडार पर
पुलिस की पूछताछ में मनोज ने कई राज उगले हैं। उसने पुलिस को बताया कि वह जिस आई बुक ऐप पर सट्टे का काराबोर चला रहा था, वह ऐप उसने दिल्ली में रहने वाले अंकित मक्कड़ से सिर्फ 9 हजार रुपये में खरीदा था। मात्र कुछ हजार रुपये में खरीदे इस ऐप के जरिये मनोज ने करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे कर डाले। माना जा रहा है कि ऐप बेचने वाला अंकित भी इस धंधे में पूरी तरह लिप्त है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही अंकित भी भी गिरफ्तारी की जाएगी।
ये है सट्टा किंग को गिरफ्तार करने वाली टीम
1- मंगलपड़ाव चौकी प्रभारी दिनेश जोशी
2- एसओजी प्रभारी संजीत राठौड़
3- हेड कांस्टेबल ललित कुमार
4- कांस्टेबल चन्दन नेगी
5- कांस्टेबल सन्तोष बिष्ट
6- कांस्टेबल हितेन्द्र वर्मा