एसजीपीसी की आम सभा में कई प्रस्ताव पेश

अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के अध्यक्ष भाई गोविंद सिंह लोंगोवाल ने सोमवार को समिति की आम सभा के दौरान सिख समुदाय से संबंधित कई प्रस्ताव पेश किए। भाई लोंगोवाल ने जम्मू-कश्मीर की सरकारी भाषाओं की सूची में पंजाबी भाषा को शामिल नहीं करने की निंदा का प्रस्ताव पास किया जिसमें कहा गया कि जम्मू-कश्मीर …
अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के अध्यक्ष भाई गोविंद सिंह लोंगोवाल ने सोमवार को समिति की आम सभा के दौरान सिख समुदाय से संबंधित कई प्रस्ताव पेश किए। भाई लोंगोवाल ने जम्मू-कश्मीर की सरकारी भाषाओं की सूची में पंजाबी भाषा को शामिल नहीं करने की निंदा का प्रस्ताव पास किया जिसमें कहा गया कि जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में लोग पंजाबी भाषा बोलते हैं। यहां पंजाबी को संवैधानिक तौर पर भी मान्यता रही है। उन्होंने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह के समय जम्मू-कश्मीर क्षेत्र सिक्ख राज का हिस्सा रहा है।
क्षेत्र के इतिहास, रवायतों साथ-साथ बड़ी संख्या लोगों की भावनाओं का ख्याल रख केन्द्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर भाषा विधेयक को पास किया है। यह अल्पसंख्यकों के साथ नाइंसाफी है। उन्होंने केन्द्र सरकार से मांग की है कि जम्मू- कश्मीर भाषा बिल में पंजाबी को फिर से शामिल किया जाए। केन्द्र सरकार द्वारा पारित तीन कृषि कानून को अस्वीकृत करने के लिए प्रस्ताव पेश किया गया। प्रस्ताव में कहा गया है कि कृषि संबंधी तीनों कानून देश के किसानों को बर्बाद करने वाले हैं।
एक अन्य प्रस्ताव द्वारा पाकिस्तान स्थित सिक्खों के गुरुद्वारों के बजूद को खत्म करने की कोशिशों की कड़ी निंदा की गई। प्रस्ताव पेश कर मांग की गई कि 1947 में देश के विभाजन के साथ पाकिस्तान में रह गए सिक्खों के सैंकड़ों गुरुद्वारों की इमारतों की देखरेख पाकिस्तान सरकार धार्मिक नज़रिये से करे। वहां कई गुरुद्वारों में पशु बांधे जा रहे हैं और कई पर नाजायज कब्जे हैं।
केन्द्र सरकार से भी मांग की गई कि पाकिस्तान में गुरुद्वारों की इमारतों के बजूद को ख़त्म किये जाने का मामला पाकिस्तान सरकार के पास उठाए। गुरुद्वारा श्री दरबार साहब करतारपुर साहब पाकिस्तान का गलियारा फिर से खोलने के लिए एक केन्द्र सरकार से मांग की गई है। कोरोना वायरस के कारण यह रास्ता अस्थाई तौर पर बंद कर दिया गया है। आम सभा में उत्तराखंड, सिक्किम और ओडिशा आदि में स्थित सिक्खों के ऐतिहासिक स्थानों का प्रबंध शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति को सौंपने की मांग की गई।