हल्द्वानी: किसान और बिल्डर में अंतर करो, किसानों को रेरा मुक्त करो 

हल्द्वानी: किसान और बिल्डर में अंतर करो, किसानों को रेरा मुक्त करो 

हल्द्वानी, अमृत विचार। शुक्रवार को नैनीताल रोड स्थित एक होटल में हुई प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता एवं हल्द्वानी बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक ललित जोशी ने कहा कि रेरा (रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट) का स्वागत करते हैं लेकिन इसके प्रावधान अव्यावहारिक है।

हल्द्वानी व आसपास में 90 प्रतिशत किसान हैं जो बड़ी छोटी जाते वाले हैं। किसान बेटी की शादी कभी बीमारी, बेटे की पढ़ाई के लिए जमीन बेचते हैं। अब रेरा लागू होने से छोटी जोत के किसान प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि रेरा में प्रावधान है कि 40 प्रतिशत भूमि छोड़नी होगी। मसलन, किसी किसान पर 10 हजार वर्ग फिट भूमि है, 500 वर्ग मीटर तकरीबन 5400 वर्ग फिट बेचने पर उस पर रेरा लागू होगा।

वह चार हजार फिट जमीन जिंदगी भर नहीं बेच सकता है। अब 600 फिट में उसका क्या होगा। आरोप लगाया कि रेरा लागू करने से पूर्व जिला प्रशासन को किसान और बिल्डर्स का अंतर करना चाहिए। छोटी जोत के किसानों को बिल्डर्स नहीं मानना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन वर्ष 2017 से शपथ पत्रों की जांच कर रहा है, इसमें किसान दोषी है तो रजिस्ट्री करने वाला रजिस्ट्रार, दाखिल खारिज करने वाला तहसीलदार, ऐसी जमीन पर नक्शे बनाने वाले प्राधिकरण के अफसर भी उतने ही दोषी हैं। भौगोलिक हालातों को देखते हुए रेरा की व्याख्या करनी चाहिए और किसानों को इससे दूर रखना चाहिए।

उन्होंने आक्रोशित स्वर में कहा कि प्रशासन प्रापर्टी डीलर्स को बदनाम कर रहा है जबकि प्रापर्टी डीलर्स का अपमान श्रम का उपहास है। मंत्री, विधायक, अफसर सभी प्रापर्टी में निवेश करते हैं ऐसे में प्रापर्टी डीलर्स के खिलाफ माहौल बनाना सही नहीं है। बेरोजगारी से जूझ रहे उत्तराखंड में प्रापर्टी डीलिंग से जीवन यापन कर रहे हैं। 

जोशी ने आरोप लगाया कि रेरा की आड़ में जिले में बड़ा बिल्डर लाने की तैयारी है इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 
पूर्व बीडीसी सदस्य अर्जुन बिष्ट एवं किसान बलजीत सिंह ने संयुक्त तौर पर कहा कि किसानों की फसल जंगली और आवारा जानवर की भेंट चढ़ जाती है ऐसे में किसान यदि जमीन बेचता है तो रेरा अड़ंगा लगाता है। इसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके विरोध में शनिवार को मंडी से एमबीपीजी तक ट्रैक्टर रैली निकाली जाएगी। यदि फिर भी सरकार नहीं चेती तो उग्र आंदोलन होगा। इस दौरान परीक्षित मिश्रा, पूर्व प्रधान राम सिंह नगरकोटी, ललित, हरीश रावत, मनोज खुल्बे, नरेंद्र खनी आदि मौजूद थे।

 

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