बागेश्वर: जिला चिकित्सालय में दलालों का बोलबाला
अस्पताल से मरीजों को ले जा रहे निजी लैब, बाहर की लिख रहे दवाइयां

सीएमएस की चेतावनी का कोई नहीं दिख रहा असर
बगेश्वर, अमृत विचार। जिला चिकित्सालय में सीएमएस द्वारा दलालों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का असर होता नहीं दिख रहा है। सीएमएस की चेतावनी के बाद भी कई दलाल चिकित्सालय से मरीजों को ले जाते दिखे। इनमें लैब संचालकों के दलाल अधिक दिखे।
जिला चिकित्सालय में लंबे समय से दलालों की सक्रियता की शिकायतें सामने आती रहती हैं, जिस पर जिलाधिकारी तक भी शिकायतें पहुंच चुकी हैं परंतु कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आए। सीएमएस डॉ. विनोद टम्टा के कार्यभार संभालने के बाद उनके द्वारा कई बार इस संबंध में चेतावनी जारी की गई, कई बार कई जागरूक मरीजों ने इस अव्यवस्था के लिए चिकित्सालय प्रशासन को जिम्मेदार मानते हुए आवाज उठाई तथा मीडिया के सामने खुलकर विरोध किया था, जिससे स्वास्थ्य विभाग समेत प्रदेश सरकार की किरकिरी होती रहती है।
इधर, बीते बुधवार को मरीजों द्वारा दलालों की सक्रियता व बाजार से दवाइयां खरीदवाने की शिकायत सीएमएस से की गई तो उन्होंने सभी चिकित्सकों व लैब संचालकों को बुलाकर उनको चेतावनी दी थी कि अगर दोबारा दलाल दिखे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी परंतु 3 दिन में ही इस चेतावनी का असर गायब दिखा।
शनिवार को कई लैबों व केमिस्ट के दलाल जिला चिकित्सालय में दिखे, इनके द्वारा चिकित्सकों के काउंटर के बाहर खड़े होकर मरीजों को अपनी दुकानों में ले जाने का क्रम जारी रहा। चिकित्सालय में लैब होने के बाद भी बाहर के लैबों में मरीजों को रक्त परीक्षण कराने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे जहां सरकारी सुविधाओं की पोल खुली। वहीं, सीएमएस की चेतावनी का असर न होने के कारण मरीजों में इसकी चर्चा रही।
सीसीटीवी कैमरे बन सकते हैं मददगार
जिला चिकित्सालय में सीएमएस द्वारा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनसे वे वार्ड आदि पर नजर रखते हैं परंतु दलालों पर नजर के लिए उन्हें वक्त नहीं मिल पाता है जबकि दलाल ओपीडी के चिकित्सकों के बाहर घूमते रहते हैं। यदि इस पर नजर रखी जाए तो ऐसों दलालों के खिलाफ कार्रवाई में मदद मिल सकती है।
साथ ही चिकित्सालय में मरीजों को रक्त परीक्षण की सुविधा के बोर्ड लगाकर मरीज को जागरूक किया जा सकता है। इस संबंध में सीएमएस डॉ. विनोद टम्टा का कहना है कि इस तरह की शिकायत आना गंभीर है। दलाल यदि नहीं सुधरे तो उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराने पर विचार किया जाएगा। इसके लिए सीसी कैमरे की मदद ली जाएगी। साथ ही बाहर से दवाइयां लिखने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।