धीमी चाल पर चिंता

शहरी क्षेत्रों में आवास की मांग तथा आपूर्ति के बीच बढ़ती खाई को पाटने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत 2015 में की गई थी। योजना का लक्ष्य 31 मार्च 2022 तक किफायती कीमत पर लगभग 20 मिलियन घरों का निर्माण करना था। बाद में योजना को वर्ष 2024 तक बढ़ा दिया गया है।
पक्के घरों का कुल लक्ष्य भी संशोधित कर 2.95 करोड़ घर कर दिया गया है। शुरुआत के बाद से ही शहरी गरीबों के लिए घर खरीदने के खर्च को कम करने वाली इस योजना ने पूरे रियल एस्टेट बाजार में बड़ा बदलाव ला दिया। परंतु अब जब घोषित लक्ष्य को पूरा करने में अब महज एक वर्ष का समय शेष है तो लोकसभा की विशेष समिति ने एक रिपोर्ट में योजना के तहत बन रहे घरों की धीमी रफ्तार पर चिंता जताई है।
अब सभी राज्यों को लक्ष्य पूरा करने के रोडमैप को भी पीएमओ के पास भेजने को कहा है। समिति ने अपनी एक सिफारिश में कहा है कि मंत्रालय तय लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समय-समय पर आवास निर्माण की परियोजनाओं की समीक्षा करे और उन कारणों की पहचान की जाए, जो परियोजनाओं में देरी की वजह बन रहे हैं।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 2020 में ही इस योजना के क्रियान्वयन की धीमी चाल पर कहा था कि स्वीकृत और तैयार हो चुके घरों के बीच का फासला इकतीस लाख बीस हजार तक पहुंच चुका है। मंत्रालय ने नाराजगी जताते हुए राज्यों से इस योजना के अमल में तेजी लाने को कहा था।
योजना के उद्देश्यों में प्राइवेट डेवलपर्स की सहायता से झुग्गी-झोपड़ियों का पुनर्वास करना, क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना के जरिए गरीबों के लिए किफायती आवास को बढ़ावा देना, सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों की साझेदारी में किफायती घरों का निर्माण करना तथा व्यक्तिगत घर निर्माण के लिए सब्सिडी प्रदान करना शामिल है।
यानि योजना के कुछ हिस्से पूरी तरह से निजी निवेश पर निर्भर हैं। जानकारों के मुताबिक योजना में निजी भागीदारी संतोषजनक नहीं रही है। यह सरकार के लिए चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है। योजना में देरी के लिए कोरोना महामारी और राज्यों के खराब प्रदर्शन को जिम्मेदार ठहाराया जा रहा है।
लक्षित इकाइयों का 70 प्रतिशत हिस्सा छह राज्यों में है। केवल दो राज्यों-उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की पूर्णता दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। बिहार में सबसे कम पूर्णता दर है। अब देश महामारी से लगभग उबर चुका है, केंद्रीय बजट में योजना के लिए 66 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है तो धीमी गति के लिए कोई बहाना नहीं बनाया जाना चाहिए।