खबर का असर: बेसहारों को मिला सहारा, मदद को आगे बढ़े हाथ
17.jpg)
अमृत विचार, अयोध्या। शुक्रवार को अमृत विचार ने "सिर से उठा मां-बाप का साया, अब सहारे की दरकार" शीर्षक से खबर प्रकाशित कर अनाथ बच्चों की समस्या समाज के सामने रखी तो उन्हें सहारा मिलने का सिलसिला शुरू हो गया। बच्चों की देखरेख व उनकी शिक्षा जिम्मा उठाने के लिए जनप्रतिनिधि, समाजसेवी सहित समाज के गणमान्य लोगों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया। किसी ने आर्थिक मदद की, किसी ने घर का तो किसी ने स्कूल की फीस वहन करने का आश्वासन दिया।
सुबह पूर्व राज्यमंत्री व सपा नेता तेज नारायण पांडेय साहबगंज स्थित लोनियाना मोहल्ला स्थित आंचल और अमित के घर पहुंच गए। पूर्व राज्यमंत्री ने बच्चों को 20 हजार रुपये की आर्थिक मदद के साथ ही कंबल भेंट किया। उन्होंने कहा कि बच्चों की पढ़ाई के साथ अन्य किसी भी प्रकार की मदद के लिए समाजवादी पार्टी बच्चों के साथ खड़ी है।
17.jpg)
सपा महानगर प्रवक्ता राकेश यादव ने बताया कि सुकन्या देवी इंटर कॉलेज प्रबंधक दिनेश प्रताप सिंह ने अपने विद्यालय में पढ़ रहे अमित वर्मा की पढ़ाई पूरा खर्च वहन करने का जिम्मा लिया है। उन्होंने कहा कि यदि आंचल भी उनके स्कूल में पढ़ती चाहती है तो विद्यालय प्रबंधन बच्ची के पढ़ाई का भी पूरा वहन करेगी। इस अवसर महानगर अध्यक्ष श्यामकृष्ण श्रीवास्वत, हामिद जाफर मीसम सहित कई सपा नेता मौजूद रहे।
बच्चों के घर पहुंचे पूरा ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि शिवेंद्र सिंह ने आर्थिक मदद दी और आवास निर्माण का आश्वासन दिया। बाल कल्याण समिति के प्रमुख सर्वेश अवस्थी ने बच्चों को बाल सेवा योजना के तहत प्रतिमाह 2500 की सहायता राशि दिलाने की बात कही। कुर्मी क्रांति संगठन ने बच्चों को आर्थिक सहायता के रूप में 5100 रुपये का चेक सौंपा है। संगठन के अध्यक्ष रामभरोसे वर्मा ने कहा कि संगठन बच्चों की सहायता के लिए हर समय तत्पर है। वहीं मित्रमंच के प्रमुख शरद पाठक बाबा ने भी सहायता की।
मदद के लिए सभी जताया आभार
शहर के साहबगंज स्थित लोनियाना मोहल्ला निवासी कक्षा नौ की छात्रा आंचल वर्मा ने मदद के लिए सभी का आभार जताया तो वहीं मीडिया को भी धन्यवाद दिया। उसका कहना है कि लोगों के सहयोग से अब उसका डॉक्टर बनने का सपना साकार हो सकेगा।
बता दें कि आंचल के पिता की 10 साल मौत हो गई थी। जिसके बाद बेटे अमित के साथ पुत्री की पढ़ाई के साथ घर की अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए उनकी मां घरों में झाड़ू-पोछा करती थीं। 17 दिसंबर को मां की मृत्यु होने के बाद अब वह बेसहारा हो गए हैं।
यह भी पढ़ें:-लापरवाही: अयोध्या में अध्यापकों के सामने खड़ा हुआ बड़ा संकट, 150 से अधिक शिक्षकों को नहीं मिला प्रान नंबर