बांदा: धनतेरस पर महंगा हुआ बाजार, लेकिन ग्राहकों की जेब है ठंडी

बांदा: धनतेरस पर महंगा हुआ बाजार, लेकिन ग्राहकों की जेब है ठंडी

बांदा, अमृत विचार। धनतेरस के मौके पर बाजार तो काफी गर्म है, लेकिन ग्राहकों की जेब ठंडी पड़ी। सराफा बाजार में चांदी के सिक्कों को छोड़कर अन्य सभी उत्पादों में महंगाई डायन की काली छाया से आग लगी है। दीवाली ने व्यापारियों और खरीददारों की धड़कनों को तेज कर रखा है। हालांकि कंपनियां उत्पादों में …

बांदा, अमृत विचार। धनतेरस के मौके पर बाजार तो काफी गर्म है, लेकिन ग्राहकों की जेब ठंडी पड़ी। सराफा बाजार में चांदी के सिक्कों को छोड़कर अन्य सभी उत्पादों में महंगाई डायन की काली छाया से आग लगी है। दीवाली ने व्यापारियों और खरीददारों की धड़कनों को तेज कर रखा है। हालांकि कंपनियां उत्पादों में भारी छूट व ऑफर देकर ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं, लेकिन कई वर्षों से किसानों पर गिरी दैवीय आपदाओं की गाज, नोटबंदी, जीएसटी और आर्थिक मंदी के साथ बीते दो वर्षों में आई कोरोना त्रासदी का असर दीवाली की बाजार में साफ दिखाई दे रहा है।

दीपावली पर खरीददारी के लिये ग्राहकों के लिये तमाम तरह की छूट और ऑफर के साथ पांच दिनों की बाजार सज चुकी है। किसानों की बदहाली का सीधा असर दीपावली की बाजार में देखने को मिल रहा है। वहीं पिछले दो वर्षों से कोरोना की त्रासदी झेलकर टूट चुके आम आदमी का भी दीवाली की खरीददारी पर कोई खास रुझान नहीं दिख रहा है। धनतेरस पर सबसे ज्यादा खरीददारी सर्राफा बाजार से होती है।

सर्राफा बाजार में प्रतिष्ठित ज्वैलर्स मनमोहन गोयल, अविजित गोयल, सत्यप्रकाश और सुनील गोयल, इंद्रेश जड़िया का कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में सोने-चांदी की कीमतों थोड़ा राहत नजर आ रही है। बताते हैं कि जहां पिछले वर्ष सोने की कीमतें लगभग 52 हजार पांच सौ रुपए प्रति दस ग्राम थी, वहीं इस बार कीमतों में थोड़ी नरमी दिख रही है और धनतेरस के एक दिन पहले तक दस ग्राम साेने का दाम 51 हजार से अधिक है। वहीं प्रतिकिलो चांदी की कीमत 57,500 रुपए बताई गई है। हालांकि इस बार महारानी विक्टोरिया और जॉर्ज किंग वाले चांदी के सिक्के 850 रुपये में ही टिका हुआ है। ऐसे ही लक्ष्मी-गणेश अंकित चांदी का सिक्का इस बार 650 रुपये का है, जबकि पिछली गणेश-लक्ष्मी अंकित सिक्का 680 रुपये का बिका था।

लोगों का मानना है कि इस बार धनतेरस की बाजार नरम रहने की उम्मीद है। इसके पीछे बीते दो वर्षों में कोरोना त्रासदी की मार और बेमौसम बरसात से बर्बाद हुई फसलों को कारण बताया जा रहा है। धनतेरस की बाजार नरम रहे या गरम, दुकानदारों को ग्राहकों का इंतजार जरूर रहेगा और त्योहार को लेकर दुकानदार अपनी दुकानों को करीने से सजाने में जुटे गए हैं।

ये भी पढ़ें-बहराइच: पुलिस स्मृति दिवस पर शहीदों को याद कर जवानों की आंखें हुईं नम