संघर्ष का अंत हो

संघर्ष का अंत हो

यूक्रेन पर रूसी आक्रमण को आठ महीने बीत चुके हैं। युद्ध की शुरुआत में मान लिया गया था कि यूक्रेन पर रूस का आक्रमण गतिरोध में बदल जाएगा। परंतु युद्ध अब जटिल दौर में पहुंच गया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को रूस के कब्जे वाले यूक्रेन के चार क्षेत्रों में मार्शल …

यूक्रेन पर रूसी आक्रमण को आठ महीने बीत चुके हैं। युद्ध की शुरुआत में मान लिया गया था कि यूक्रेन पर रूस का आक्रमण गतिरोध में बदल जाएगा। परंतु युद्ध अब जटिल दौर में पहुंच गया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को रूस के कब्जे वाले यूक्रेन के चार क्षेत्रों में मार्शल लॉ घोषित कर दिया और रूस के सभी क्षेत्रों के प्रमुखों को अतिरिक्त आपातकालीन शक्तियां प्रदान कर दीं।

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रूसी नेता ने यूक्रेन में लड़ाई के मद्देनजर विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच संवाद बढ़ाने के लिए एक समन्वय समिति की स्थापना का भी आदेश दिया, जिसे उन्होंने ‘विशेष सैन्य अभियान’ कहा। शुरूआत से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कोशिशें जारी थीं कि किसी तरह यह युद्ध रुके और दोनों देशों के बीच सुलह हो। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रूस की निंदा करने से लेकर अन्य स्तर पर युद्ध खत्म कराने की कोशिशें जारी थीं। मगर बीते कुछ दिनों के घटनाक्रम से यह आशंका पैदा हो गई है कि यह युद्ध कहीं दुनिया के अन्य देशों के बीच भी न फैल जाए।

गौरतलब है कि क्रीमिया को देश से जोड़ने वाले पुल पर हमले के बाद रूस बेहद आक्रामक हो गया है और उसने यूक्रेन के महत्वपूर्ण स्थलों, खासकर ऊर्जा संयंत्रों पर हमलों की झड़ी लगा दी है। रूस के लगातार जारी मिसाइल हमलों और गोलाबारी से बुधवार को यूक्रेन के और अधिक गांवों, कस्बों तथा दो शहरों के कुछ हिस्से बिजली के बिना अंधकार में डूब गए। यूक्रेन को झुकाने के लिए रूस इसके ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर ताबड़तोड़ हमले कर रहा है। हालांकि रूस की जनशक्ति, सैन्य भंडार, अर्थव्यवस्था और राजनयिक संबंधों का नुकसान भी जारी है। यूक्रेन कमजोर होने के बावजूद मोर्चा छोड़ने को तैयार नहीं है।

वह जिस तरह अमेरिका और नाटो के सहयोग की ओर बढ़ रहा है, उससे युद्ध के नए मोर्चे बनने की आशंका है। यूक्रेन के चार क्षेत्रों लुहांस्क, डोनेस्क, खेरसान और जपोरीजिया को रूस में मिलाने के बाद अंतर्राष्ट्रीय पटल पर माहौल गरमा गया था। मौजूदा वक्त में देखें तो रूस यूक्रेन गतिरोध के चलते दुनिया दो या तीन खेमों में बंटती नजर आ रही है। शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में चीन, रूस और ईरान ने इस धारणा को मजबूत किया। वहीं, अमेरिका के पक्ष में भी लामबंदी मजबूत हुई है। समय रहते अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस युद्ध को रोकने की कोशिश करनी होगी ताकि पहले ही काफी तबाही मचा चुके इस संघर्ष का अंत हो सके।

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