संभावनाओं की तलाश

मौजूदा समय में दुनिया वैश्वीकरण के दौर में है। और दुनिया के किसी कोने में कुछ होता है तो सभी देश इससे प्रभावित होते हैं। यूक्रेन संघर्ष के मद्देनजर तेल की कीमतों में भारी उछाल है। अपने आर्थिक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और नागरिकों को तेल की बढ़ती कीमतों के बोझ से बचाना भारत …
मौजूदा समय में दुनिया वैश्वीकरण के दौर में है। और दुनिया के किसी कोने में कुछ होता है तो सभी देश इससे प्रभावित होते हैं। यूक्रेन संघर्ष के मद्देनजर तेल की कीमतों में भारी उछाल है। अपने आर्थिक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और नागरिकों को तेल की बढ़ती कीमतों के बोझ से बचाना भारत के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है।
ऐसे में विदेश मंत्री एस जयशंकर सोमवार से तीन लैटिन अमेरिकी देशों के दौरे पर हैं। यात्रा के पहले चरण में साओ पाउलो (ब्राजील) पहुंचे जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन संघर्ष ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को काफी प्रभावित किया है। हमें कूटनीति के माध्यम से, विभिन्न सरकारों के साथ बातचीत के माध्यम से यह सुनिश्चित करना है कि हमारे आर्थिक हितों की अच्छी तरह से सुरक्षा हो और भारतीय उपभोक्ताओं को तेल की लगातार बढ़ती कीमतों से जितना संभव हो सके बचाया जाए। डॉ. जयशंकर पहली बार दक्षिण अमेरिका की यात्रा पर हैं।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लैटिन अमेरिका एक स्थिर और तेजी से बढ़ते हुए मध्यम वर्ग के साथ, उभरते हुए बाज़ारों में से एक है। भारत लैटिन अमेरिका से महत्वपूर्ण संसाधनों का आयात भी करता है जिसमें भारत द्वारा सबसे ज्यादा आयातित वस्तु कच्चा पेट्रोलियम तेल का 15 से 20 प्रतिशत, तांबा, चांदी और सोना जैसे खनिज और वनस्पति तेल भी शामिल हैं। लैटिन अमेरिका दालों के मामले में भारत की कुछ आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है और तिलहन का चयन कर सकता है।
लैटिन अमेरिका भारत के लिए हाइड्रोकार्बन का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभरा है। यह वो क्षेत्र रहा है जहां हमेशा से भारतीय राजनेताओं ने सबसे कम दौरा किया है और एशिया, अफ्रीका और यूरोप के मुकाबले इस क्षेत्र को लेकर बहुत कम ध्यान दिया जाता है। हालांकि भारत चिली और मर्कोसुर के साथ प्रिफेरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (पीटीए) का लाभ उठाता रहा है लेकिन अर्जेंटीना, ब्राजील, पराग्वे और उरुग्वे जैसे दक्षिण अमेरिकी समूह के साथ भारत के कारोबारी दायरे सीमित हैं।
इन देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय व्यापार का हिस्सा बेहद कम है। लैटिन अमेरिका में व्यापार और निवेश के भरपूर अवसर मौज़ूद हैं। क्षेत्र में संभावनाओं को उजागर करने के लिए और अधिक जुड़ाव की आवश्यकता है। भारत को इसका ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाने के लिए एक उचित नीति बनानी चाहिए जो भारत की ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल, आईटी, ऊर्जा और कृषि कंपनियों के लिए बेहतर साबित हो और लैटिन अमेरिका के कमोडिटी निर्यातकों और इस क्षेत्र की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों और सेवा क्षेत्र को भी इससे फ़ायदा मिल सके।