पीजी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए न्यूनतम नीट परसेंटाइल को दी चुनौती, HC ने किया खारिज

पीजी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए न्यूनतम नीट परसेंटाइल को दी चुनौती, HC ने किया खारिज

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट (delhi high court) ने शुक्रवार को परास्नातक (पीजी) चिकित्सा पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए अनिवार्य आवश्यकता के रूप में राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक तय करने के नियम को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि चिकित्सकों की गुणवत्ता के मुद्दे …

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट (delhi high court) ने शुक्रवार को परास्नातक (पीजी) चिकित्सा पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए अनिवार्य आवश्यकता के रूप में राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक तय करने के नियम को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि चिकित्सकों की गुणवत्ता के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसमें मानव जीवन के लिए जोखिम शामिल है।

वहीं, मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस प्रावधान को केवल इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता कि सीट खाली पड़ी हैं और अदालत के लिए यह अनुचित होगा कि वह चिकित्सा शिक्षा मानकों के मामले में हस्तक्षेप करे जिसे विधिवत और पूरी सूझबूझ के साथ सरकार के अधिकारियों ने निर्धारित किया है। अदालत ने कहा कि यह जीवन और मौत से जुड़ा मामला है।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की सदस्यता वाली पीठ ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के मानकों को कम करने से समाज पर कहर टूट सकता है। अदालत ने कहा कि वह अधिकारियों को सीट भरने का निर्देश नहीं दे सकती, खासकर तब जब संबंधित व्यक्तियों ने न्यूनतम परसेंटाइल नहीं प्राप्त किया हो।

याचिकाकर्ताओं, पीजी में दाखिले के इच्छुक तीन चिकित्सक, ने स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा विनियम, 2000 के विनियमन 9 (3) को रद्द करने के निर्देश के लिए जनहित याचिका दायर की थी, जो सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी के नीट-पीजी में प्रवेश के लिए न्यूनतम 50 परसेंटाइल की जरूरी शर्त लगाता है, जबकि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए यह सीमा 40 प्रतिशत है।

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