बाराबंकी: जलकुंभी से बनाए जाएंगे कपड़े और कागज, सोलर लूम से बनेगा धागा

बाराबंकी। जलकुंभी से अब कागज और कपड़े बनाने की तैयारी है। मनरेगा की धनराशि का उपयोग कर जिले की झीलों और तालाबों से जलकुंभी या निकाली जाएंगी। इस जलकुंभी का उपयोग कर धागे और कागज बनाए जाएंगे।धागों का उपयोग कपड़े तैयार करने में होगा। मिलों से प्रतिस्पर्धा को देखते हुए इसके लिए सोलर मशीनों का …
बाराबंकी। जलकुंभी से अब कागज और कपड़े बनाने की तैयारी है। मनरेगा की धनराशि का उपयोग कर जिले की झीलों और तालाबों से जलकुंभी या निकाली जाएंगी। इस जलकुंभी का उपयोग कर धागे और कागज बनाए जाएंगे।धागों का उपयोग कपड़े तैयार करने में होगा। मिलों से प्रतिस्पर्धा को देखते हुए इसके लिए सोलर मशीनों का प्रयोग किया जाएगा। बाराबंकी में जिला प्रशासन यह अभिनव प्रयोग करने जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक न केवल जलकुंभी से कागज का कपड़े बनेंगे, बल्कि इसके बाद जो वेस्टेज बचेगा उसका उपयोग खाद बनाने में किया जाएगा। इसके लिए बड़ी कंपनियों से करार किए जाने के लिए बातचीत चल रही है। तालाबों के साफ होने के बाद संबंधित तालाबों और झीलों को मनरेगा से ही पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित किया जाएगा।
यह तालाब और झीलें स्वयं सहायता समूह को आवंटित किए जाएंगे। जो संबंधित तालाब और जेल में मत्स्य पालन का काम भी कर सकेंगे। इस काम में मत्स्य पालन विभाग की भी मदद ली जाएगी।
फिलहाल यह प्लान अभी तक पाइप लाइन में ही है। इस प्लान को साकार करने का जिम्मा उपायुक्त स्वरोजगार को सौंपा गया है। जो स्वयं सहायता समूह की मदद से इस काम को अंजाम देंगे। जिसमें निजी क्षेत्र के उद्यमियों से भी मदद लिए जाने की योजना है।
योजना अंजाम तक पहुंची तो बाराबंकी प्रदेश का पहला ऐसा जिला होगा जहां जलकुंभियों के उपयोग से न केवल रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे बल्कि जलकुंभी की समस्या का भी समाधान हो सकेगा। साथ ही छोटे-छोटे पिकनिक स्पॉट से लोगों को आकर्षित करने की भी कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
तालाब से निकलने वाली जलकुंभी का उपयोग कर कागज और धागे बनाने के लिए एक कंपनी से बात चल रही है। मनरेगा से जलकुंभियां निकाली जाएंगी। तालाब साफ होने के बाद इसे पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित किया जाएगा तथा मत्स्य पालन का भी काम शुरू होगा।-वीके मोहन,उपायुक्त स्वरोजगार बाराबंकी
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