लखनऊ: जिसने की शिकायत उसी पर लग गए आरोप, जानें स्वास्थ्य विभाग में तैनात संविदा कर्मचारियों के शोषण की कहानी!

लखनऊ: जिसने की शिकायत उसी पर लग गए आरोप, जानें स्वास्थ्य विभाग में तैनात संविदा कर्मचारियों के शोषण की कहानी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में लगभग एक लाख स्वास्थ्य कर्मी संविदा पर तैनात किए गए हैं। संविदा पर तैनात स्वास्थ्य कर्मचारियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर रखा गया है। आरोप है कि संविदा पर तैनात इन स्वास्थ्य कर्मियों का हर स्तर पर उत्पीड़न हो रहा है। मानसिक …

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में लगभग एक लाख स्वास्थ्य कर्मी संविदा पर तैनात किए गए हैं। संविदा पर तैनात स्वास्थ्य कर्मचारियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर रखा गया है। आरोप है कि संविदा पर तैनात इन स्वास्थ्य कर्मियों का हर स्तर पर उत्पीड़न हो रहा है। मानसिक सामाजिक तथा शारीरिक उत्पीड़न झेल रहे संविदा कर्मचारियों ने इसकी शिकायत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक से की है।

कर्मचारियों के संगठन संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ ने मिशन निदेशक को पत्र लिखकर पूरी समस्या से अवगत कराया, साथ ही यह भी कहा है कि समिति बनाकर पूरे मामले की जांच की जाए और आरोपित संविदा कर्मियों को न्याय दिलाया जाए। दरअसल पूरा मामला यहां से शुरू होता है कि संविदा पर तैनात कर्मचारियों पर बिना जांच के ही आरोप तय कर दिए जा रहे हैं, इतना ही नहीं उन कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य कर्मियों पर जो आरोप लगाए जा रहे हैं वह आधारहीन है इन आरोपों की जांच तक नहीं कराई गई।

संघ की तरफ से मिशन निदेशक को भेजे गए पत्र में जिन मामलों का जिक्र किया गया है उनमें कुशीनगर तथा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों की बात प्रमुखता से रखी गई। भेजे गए पत्र में लिखा गया है कि कुशीनगर जिले में मिशन के तहत एएनएम के पद पर चयन प्रक्रिया में प्रपत्र साक्षरता में हुई अनियमितता को आधार बनाकर संविदा कर्मी को बिना जांच के दोषी मान लिया गया और उसके ऊपर एफआईआर तक कर दी गई। कुशीनगर में यह कोई पहला मामला नहीं है इस तरह के पहले भी प्रकरण सामने आते रहे हैं।

मिशन निदेशक को भेजे गए शिकायती पत्र में राजधानी के डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के ब्लड बैंक में तैनात डॉ. रागिनी सिंह का मामला प्रमुखता से उठाया गया है। बताया जा रहा है कि डॉक्टर रागिनी लोहिया संस्थान के ब्लड में साल 2018 से काम कर रही थीं। ब्लड बैंक में कार्यशैली तथा अनिमितताओं को लेकर डॉक्टर रागिनी ने लिखित शिकायत संस्थान के निदेशक से की, जिसके बाद पूरे मामले की जांच हुई। आरोप है कि इसके बाद शिकायतकर्ता डॉक्टर रागिनी को ही कार्य मुक्त कर दिया गया। इतना ही नहीं अब उन पर एफआईआर दर्ज करानें तथा नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाए जाने की धमकी दी जा रही है।

संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ के महामंत्री योगेश उपाध्याय ने बताया है कि डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के ब्लड बैंक में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों को इतना प्रताड़ित किया गया कि एक कर्मचारी ने त्यागपत्र दे दिया, जबकि दूसरे ने अपना तबादला कराना ही मुनासिब समझा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक को पत्र लिखकर सभी प्रकरणों की जांच कराकर उचित कार्रवाई की मांग की गई है।

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