बंगले में ‘अवैध’ बदलाव मामले में नारायण राणे को अदालत से नहीं मिली राहत

बंगले में ‘अवैध’ बदलाव मामले में नारायण राणे को अदालत से नहीं मिली राहत

मुंबई। बंबई उच्च न्यायालय ने केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को मुंबई के जुहू इलाके में स्थित उनके बंगले में पर्यावरण मानदंडों के कथित उल्लंघन के मामले में बृहस्पतिवार को कोई राहत देने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एम. एस. कार्णिक की पीठ ने कहा कि पिछले महीने राणे को नोटिस …

मुंबई। बंबई उच्च न्यायालय ने केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को मुंबई के जुहू इलाके में स्थित उनके बंगले में पर्यावरण मानदंडों के कथित उल्लंघन के मामले में बृहस्पतिवार को कोई राहत देने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एम. एस. कार्णिक की पीठ ने कहा कि पिछले महीने राणे को नोटिस जारी करने वाली जिला तटीय क्षेत्र निगरानी समिति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि क्या इसके लिए उसके पास जरूरी अधिकार क्षेत्र है।

पीठ ने कहा कि यदि समिति इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि उसके पास जरूरी अधिकार क्षेत्र है और राणे को जारी किया गया नोटिस वैध है, तो वह आवश्यक कदम उठा सकती है। राणे ने 24 मई के नोटिस को रद्द किए जाने का अनुरोध करते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोनी ने बृहस्पतिवार को पीठ से कहा कि नोटिस से विध्वंस का खतरा नहीं है बल्कि पर्यावरण और तटीय क्षेत्र के मानदंडों के कथित उल्लंघन को लेकर राणे से सिर्फ स्पष्टीकरण मांगा गया है। इस पर पीठ ने कहा कि राणे को नोटिस का जवाब देना चाहिए और तटीय क्षेत्र के अधिकारी जो भी कार्रवाई करते हैं, वह कानून के अनुरुप होनी चाहिए।

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