तबाही का खतरा

तबाही का खतरा

यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध छिड़ा है। रूस ने एक बार फिर यूक्रेन से बातचीत की पेशकश की है। रूस ने दावा किया है कि यूक्रेन अमेरिका के इशारों पर काम कर रहा है। अगर तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो वह परमाणु युद्ध होगा और विनाशकारी होगा। रूस के विदेश मंत्री का तीसरे विश्वयुद्ध और …

यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध छिड़ा है। रूस ने एक बार फिर यूक्रेन से बातचीत की पेशकश की है। रूस ने दावा किया है कि यूक्रेन अमेरिका के इशारों पर काम कर रहा है। अगर तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो वह परमाणु युद्ध होगा और विनाशकारी होगा। रूस के विदेश मंत्री का तीसरे विश्वयुद्ध और परमाणु हथियारों की बात करना निश्चित रूप से तनाव को बढ़ाने वाला है जबकि दुनिया पहले और दूसरे विश्व युद्ध में विनाश देख चुकी है।

कुछ दिन पहले ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने अपनी न्यूक्लियर फोर्स को सतर्क रहने का आदेश दिया था। रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन के खिलाफ सैन्य हमला शुरू किया था। अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने इस हमले के बाद रूस पर कड़े आर्थिक एवं अन्य प्रतिबंध लगाए हैं। निश्चित रूप से आने वाले वक्त में रूस पर इनका बड़ा असर होगा। यूरोप के आर्थिक रूप से समृद्ध देशों से लेकर छोटे प्रशांत द्वीप देश तक कई देशों ने यूक्रेन पर रूस के हमले की निंदा की है।

उधर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने पहले ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ संबोधन की शुरुआत भी यूक्रेन संकट के मुद्दे से ही की। उन्होंने कहा पुतिन ने सोचा था कि वह यूक्रेन में घुस जाएंगे और दुनिया कुछ नहीं करेगी, जबकि इसके बजाय उन्हें ऐसी एकजुटता का सामना करना पड़ा, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। अमेरिका ने अपने हवाई क्षेत्र को रूसी विमानों के लिए बंद करने की घोषणा की है।
रूस-यूक्रेन युद्ध को हल करने के लिए पहले दौर की बातचीत पिछले रविवार को बेलारूस-यूक्रेन सीमा के पास हुई थी। वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला था, हालांकि दोनों पक्ष फिर से मिलने पर सहमत हुए थे और दोनों देश एक दूसरे को धमकाते ही रहे थे। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने रूस पर आरोप लगाया कि वह अपने आक्रमण को जारी रखते हुए उन्हें रियायतों के लिए मजबूर करने की कोशिश कर रहा है।

आक्रमण के बाद जो घटनाक्रम सामने आया है उससे यही संकेत मिलता है कि यह संघर्ष लंबा चलेगा और यूरोप तथा अमेरिका दोनों इसमें शामिल होंगे। इसके अलावा अनिवार्य तौर पर भूराजनीतिक प्राथमिकताएं एवं गठबंधन बदल जाएंगे। चीन भारत की उत्तरी और पूर्वी सीमा पर अपना शक्ति प्रदर्शन कर रहा है। अब अमेरिका का ध्यान नाटो की ओर होने से वह हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर जोर कम कर सकता है। अमेरिका के सामरिक रुख में बदलाव भारत के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

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