बरेली: दो वेरियंट का समायोजन कर सकता है नुकसान

बरेली: दो वेरियंट का समायोजन कर सकता है नुकसान

बरेली, अमृत विचार। बीते सालों में कोरोना के डेल्टा, बीटा, गामा, कप्पा सहित कई वेरियंट आए। इनमें सबसे ज्यादा डेल्टा ने जमकर कहर बरपाया। स्वास्थ्य विभाग और वैज्ञानिकों द्वारा विकसित कोरोना की वैक्सीन की बदौलत फिलहाल कोविड 19 की स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन कोरोना के नए वेरियंट को लेकर फिर से चिंताए बढ़ने लगी …

बरेली, अमृत विचार। बीते सालों में कोरोना के डेल्टा, बीटा, गामा, कप्पा सहित कई वेरियंट आए। इनमें सबसे ज्यादा डेल्टा ने जमकर कहर बरपाया। स्वास्थ्य विभाग और वैज्ञानिकों द्वारा विकसित कोरोना की वैक्सीन की बदौलत फिलहाल कोविड 19 की स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन कोरोना के नए वेरियंट को लेकर फिर से चिंताए बढ़ने लगी हैं। इसके संक्रमण पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय स्तर पर अनेक प्रयास किए जा रहे हैं।

वैक्सीन विज्ञान के पूर्व राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. अतुल अग्रवाल का कहना है कि कोरोना की दोनों वैक्सीन लगने के बाद ओमिक्रान वेरियंट का असर कोरोना के अन्य वेरियंट की तरह प्रभावी नहीं होगा। हालांकि इसके संक्रमण के फैलने की गति सभी वेरियंट से ज्यादा है लेकिन उतना घातक नहीं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक देशभर में 90 फीसद से ज्यादा व्यस्कों को कोरोना की पहली डोज लग चुकी है लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर यह वेरियंट भी भारी नुकसान पहुंचा सकता है। साउथ अफ्रीका से शुरू हुए ओमिक्रान ने शुरूआती 50 दिनों में भयंकर तबाही मचाई थी।

डा. अतुल अग्रवाल

हालांकि बाद में वहां काफी जद्दोजहद के बाद लोगों की मौत के आंकड़ों में कमी आने लगी। इसके पीछे की वजह यह रही कि वहां ओमिक्रान और डेल्टा वेरियंट (एंटीजेनिक शिफ्ट ) साथ-साथ हावी रहे और जिससे पैदा हुए तीसरे वेरियंट से वहां भारी तबाही देखने में आई। भारत में शुरूआत से कोविशिल्ड वैक्सीन लगाई जा रही है।

जो आगामी 3 जनवरी से 12 से 15 वर्ष आयु के बीच के लोगों को लगाई जाएगी। यह वैक्सीन ओमिक्रान से बचाव में कारगर है। यहां अभी तक पाए गए जिन लोगों में ओमिक्रान की पुष्टि हुई है, उनके लक्षण माइल्ड देखे जा रहे हैं। ऐसे लोगों को चाहिए की वह सतर्क रहें और सरकार की ओर से बताए जा रहे सतर्कता के नियमों का पालन करें।

डा. अतुल अग्रवाल का कहना है कि सरकारी या निजी चिकित्सकों की तरफ से इस महामारी के खिलाफ कोरोना की पहली लहर की शुरूआत से ही लोगों के बचाव के लिए अथक प्रयास किए जा रहे हैं। नए वेरियंट ऑमिक्रान को लेकर भी चिकित्सकों द्वारा हर स्तर की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। नियंत्रण की स्थिति में यह भी देखा जा रहा है कि दोनों डोज लेने के बाद भी लोगों में कोरोना संक्रमण पाया जा रहा है। लेकिन इससे यह कतई नहीं कहा जा सकता कि वैक्सीन प्रभावी नहीं। बल्कि वैक्सीन की कारगर क्षमता का आंकलन इसके आविष्कार के बाद कई चरणों में पूरा किया गया है और यह पूर्णतया विश्वसनीय हैं।

अब किशोरों को भी वैक्सीन लगने वाली है, ताकि इस संक्रमण के प्रभाव से उनको सुरक्षित रखा जा सके। ओमिक्रान वेरियंट के लोगों में अब तक मिले मामलों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि इस संक्रमण के फैलने की गति अन्य वेरियंट से ज्यादा तेज है लेकिन पहले के वेरियंट के जितना प्रभावी नहीं है।

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