बागेश्वर: कुमाऊंनी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग

बागेश्वर, अमृत विचार। कुमाऊंनी राष्टीय भाषा सम्मेलन में कुमाऊंनी भाषा को संविधान की आंठवी अनुसूची में शामिल करने व इसे शिक्षण संस्थानों में अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करने की वकालत की। तीन दिन तक चले सम्मेलन के अंतिम सत्र की अध्यक्षता एडवोकेट जमन सिंह बिष्ट ने की। इस दौरान मुख्य अतिथि साहित्यकार व …
बागेश्वर, अमृत विचार। कुमाऊंनी राष्टीय भाषा सम्मेलन में कुमाऊंनी भाषा को संविधान की आंठवी अनुसूची में शामिल करने व इसे शिक्षण संस्थानों में अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करने की वकालत की। तीन दिन तक चले सम्मेलन के अंतिम सत्र की अध्यक्षता एडवोकेट जमन सिंह बिष्ट ने की। इस दौरान मुख्य अतिथि साहित्यकार व कवि गोपाल दत्त भट्ट ने कहा कि कुमाऊंनी को शैक्षिक पाठयक्रम में शामिल किया जाए।
कहा कि यदि समय पर इस विषय पर कार्य नहीं किया तो आने वाले समय में यह भाषा विलुप्त हो जाएगी। अध्यक्षता करते हुए जमन सिंह बिष्ट ने कहा कि कुमाऊंनी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का कार्य राजनीतिक इच्छा शक्ति के बल पर ही किया जा सकता है।
संचालन करते हुए पहरू के संपादक डा. हयात सिंह रावत ने कहा कि कुमाऊंनी भाषा के संरक्षण हेतु सभी लोगों को आगे आने की आवश्यकता है। उन्होंने राज्य में अकादमी खोले जाने पर बल दिया। सम्मेलन में आयोजकों ने बागेश्वर में सम्मेलन करने पर डा कुंदन रावत, डा राजीव जोशी, नरेंद्र खेतवाल, गोपाल बोरा, किशन सिंह मलड़ा समेत उपस्थित जनता का आभार व्यक्त किया।
पुस्तकों का विमोचन हुआ
बागेश्वर। सम्मेलन में साहित्यकार गोपाल बोरा के नाटक नौ रत्न, दिनेश भट्ट के निबंध संग्रह हमरो पर्यावरण और जैव विविधता पुस्तकों का विमोचन किया गया। इसके अलावा साहित्यकार गोपाल दत्त भट्ट पर केंद्रित गोपाल दत्त भट्ट विशेषांक का लोकार्पण हुआ।