चौंकाने वाले आंकड़े

कोरोना महामारी के चलते देश की अर्थव्यवस्था लखखड़ा गई। खासतौर से वर्ष 2020 आर्थिक संकट का साल रहा। संपूर्ण लाकडाउन ने स्थितियों को और खराब बनाया। हर वर्ग के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान व्यापारियों के आत्महत्याओं के प्रतिशत में पहले वर्ष की तुलना में 50 फीसदी की वृद्धि देखी गई। …
कोरोना महामारी के चलते देश की अर्थव्यवस्था लखखड़ा गई। खासतौर से वर्ष 2020 आर्थिक संकट का साल रहा। संपूर्ण लाकडाउन ने स्थितियों को और खराब बनाया। हर वर्ग के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान व्यापारियों के आत्महत्याओं के प्रतिशत में पहले वर्ष की तुलना में 50 फीसदी की वृद्धि देखी गई। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों से पता चलता है कि कारोबारी भी भारी दबाव और तनाव में रहा।
एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक एक साल में 10,677 किसानों की तुलना में 2020 में 11,716 व्यापारियों ने आत्महत्या की। इनमें से 11,000 से अधिक मौतों में से 4,356 व्यापारी दुकानदार और 4,226 विक्रेता थे। बाकी को अन्य व्यवसायों की श्रेणी में शामिल किया गया है। अब तक यह माना जाता था कि फसल खराब होने और बढ़ते कर्ज के कारण किसान अधिक आत्महत्या करते हैं, लेकिन इससे पता चलता है कि व्यवसायी वर्ग में तनाव कम नहीं है। देश के व्यापारियों, उद्यमियों का बड़ा हिस्सा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) का है। कोरोना महामारी ने सबसे ज्यादा नुकसान उन्हें पहुंचाया।
एक रिपोर्ट के मुताबिक एक हजार एमएसएमई उद्यमियों के बीच कराए गए एक सर्वे में पता चला था कि इसमें से 70 फीसदी से अधिक लोग कोरोना महामारी से प्रभावित हुए थे। लाकडाउन के दौरान लोगों का दुकानों और बाजारों में जाना बंद हो गया था। ऑनलाइन डिलीवरी से दुकानदारों को चोट पहुंची। इनमें से अधिकांश सूक्ष्म संस्थाएं बहुत छोटी पूंजी पर काम करती हैं, यदि लंबे समय तक उनका काम नहीं चलता है तो परिवार को चलाने का भार उन्हें अवसाद में धकेल देता है।
आंकड़ों की बात करें तो पिछले साल भारत में तकरीबन एक लाख 53 हज़ार लोगों ने आत्महत्या की, जिसमें से सबसे ज्यादा तकरीबन 37 हज़ार दिहाड़ी मजदूर थे। जान देने वालों में सबसे ज्यादा तमिलनाडु के मज़दूर थे, फिर मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और गुजरात के मजदूरों की संख्या है। आबादी के लिए लिहाज से उत्तर प्रदेश बड़ा राज्य है लेकिन आत्महत्या के मामले अनुपात में कम हैं। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी की एक रिपोर्ट की मानें तो महामारी की दूसरी लहर के चलते करीब एक करोड़ लोगों का रोजगार छिना।
कोविड-19 के कारण 97 प्रतिशत परिवारों की आय कम हुई। ऐसे में देशव्यापी लाकडाउन के कारण एमएसएमई को हुए नुकसान का पता लगाने के लिए सरकार की ओर से अध्ययन कराया जाना जरूरी है ताकि छोटे व्यापारी वर्ग के कल्याण के लिए कार्रवाई की जा सके।