अनेकों रोगों में लाभकारी है लाल मसूर की दाल- प्रशूंन सचान

कानपुर। आमतौर पर दालों को प्रोटीन का अच्छा श्रोत माना जाता है। वहीं, लाल दाल के नाम से प्रचलित मसूर दाल दस्त, बहुमूत्र, प्रदर और अनियमित पाचन क्रिया समेत अनेक रोगों में लाभकारी है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के शस्य विज्ञान विभाग में शोधरत प्रशूंन सचान ने मंगलवार को बताया कि दलहनी …
कानपुर। आमतौर पर दालों को प्रोटीन का अच्छा श्रोत माना जाता है। वहीं, लाल दाल के नाम से प्रचलित मसूर दाल दस्त, बहुमूत्र, प्रदर और अनियमित पाचन क्रिया समेत अनेक रोगों में लाभकारी है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के शस्य विज्ञान विभाग में शोधरत प्रशूंन सचान ने मंगलवार को बताया कि दलहनी फसलों में मसूर का अपना एक अलग महत्वपूर्ण स्थान है।
मसूर दाल जिसे लाल दाल के नाम से जाना जाता है। इसके उत्पादन में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। इसके 100 ग्राम दाने में औसतन 25 ग्राम प्रोटीन, 1.3 ग्राम वसा, 7.8 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 3.2 ग्राम रेशा, 68 मिलीग्राम कैल्शियम, 7 मिलीग्राम लोहा, 0.21 मिलीग्राम राइबोफ्लेविन, 0.51 मिलीग्राम थायमीन और 4.8 मिलीग्राम नियासिन पाया जाता है। जो मानव स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, इसके सेवन से अन्य दालों की अपेक्षा ज्यादा पौष्टिकता मिलता है।
प्रशूंन बताया कि रोगियों के लिए यह दाल अत्यंत लाभप्रद है। यह दस्त, बहुमूत्र, प्रदर, कब्ज व अनियमित पाचन क्रिया में लाभकारी है। इसका हरा व सूखा चारा पशुओं के लिए भी स्वादिष्ट व पौष्टिक होता है।
उन्होंने किसानों को सलाह देते हुए कहा की अधिक पैदावार के लिए मध्य नवंबर तक इसकी बुवाई करते हैं। समय से बुवाई के लिए 30 से 35 किलोग्राम व देर से बुवाई के लिए 50 से 60 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्यक होती है और उर्वरक 20 किलोग्राम नत्रजन, 40 किलोग्राम फास्फोरस, 20 किलोग्राम पोटाश व 20 किलोग्राम सल्फर प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है। जिंक की कमी वाले क्षेत्रों में 25 किलोग्राम जिंक प्रति हेक्टेयर की दर से दें। बुवाई के पूर्व बीज का शोधन अवश्य कर दें।
साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि किसान भाई आधुनिक तरीके से इसकी उन्नत खेती करें, तो दानों के उपज 20 से 25 कुंतल व भूसे की उपज 30 से 35 कुंतल प्रति हेक्टेयर ली जा सकती है। इसकी उन्नतशील प्रजातियां जैसे- डीपीएल 15, डीपीएल 62, नूरी, के 75, आइ पी एल 81, एलएस 218 प्रमुख हैं।