21 सितंबर से हो रही है पितृपक्ष की शुरुआत, जानें श्राद्ध करने का विधि विधान

21 सितंबर से हो रही है पितृपक्ष की शुरुआत, जानें श्राद्ध करने का विधि विधान

हल्द्वानी, अमृत विचार। सोमवार 21 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत होने जा रही है। हालांकि पूर्णिमा तिथि के दिन श्राद्ध पड़ने के साथ रविवार को भी श्राद्ध संपन्न हुए। छह अक्तूबर तक पितरों का तर्पण किया जाएगा। इस दौरान धार्मिक, मांगलिक कार्य नहीं होंगे। पितृपक्ष के संपन्न होने के बाद नवरात्र की शुरुआत होगी। पितृपक्ष …

हल्द्वानी, अमृत विचार। सोमवार 21 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत होने जा रही है। हालांकि पूर्णिमा तिथि के दिन श्राद्ध पड़ने के साथ रविवार को भी श्राद्ध संपन्न हुए। छह अक्तूबर तक पितरों का तर्पण किया जाएगा। इस दौरान धार्मिक, मांगलिक कार्य नहीं होंगे। पितृपक्ष के संपन्न होने के बाद नवरात्र की शुरुआत होगी।

पितृपक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध करेंगे। दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए अनुष्ठान करेंगे। पंडित रमेश चंद्र पांडे शास्त्री के मुताबिक, पितरों के तर्पण से पितृ प्रसन्न होते हैं। जिस तिथि को व्यक्ति का निधन होता है उसी तिथि को उसका श्राद्ध करने की परंपरा है। श्राद्ध करने से पितृ दोष शांत होता है। और घर में पितरों का आशीर्वाद बना रहता है। उन्होंने बताया कि श्राद्ध पक्ष के दौरान किसी नई खरीदारी व गृह प्रवेश समेत अन्य मांगलिक कार्य, धार्मिक अनुष्ठान नहीं होंगे।