नैनीताल: सरयू नदी में खनन पर अगली सुनवाई अब 7 अक्टूबर के बाद

नैनीताल: सरयू नदी में खनन पर अगली सुनवाई अब 7 अक्टूबर के बाद

नैनीताल,अमृत विचार। उत्तराखंड हाइकोर्ट ने सरयू नदी बागेश्वर में भारी मशीनों से खनन की अनुमती दिए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले को सुनने के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए तिथि छः सप्ताह बाद नियत की है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा …

नैनीताल,अमृत विचार। उत्तराखंड हाइकोर्ट ने सरयू नदी बागेश्वर में भारी मशीनों से खनन की अनुमती दिए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले को सुनने के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए तिथि छः सप्ताह बाद नियत की है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में हुई।

पूर्व में कोर्ट ने नदी में भारी मशीनों द्वारा खनन करने पर रोक लगा दी थी। साथ में कोर्ट ने यह भी कहा था कि प्रभावित लोग कोर्ट में अपना पक्ष रखें। जिसमें से आज कुछ खनन व्यवसायियों द्वारा प्रार्थना पत्र देकर कहा कि उनको सुना जाए। क्योंकि लॉक डाउन में खनन कार्य हेतु मजदूर नहीं मिलने के कारण उनको नुकसान हो रहा है। इसलिए मशीनों से खनन की अनुमति दी जाए। जिस पर कोर्ट ने उनको सुनने के लिए छः सप्ताह बाद की तिथि नियत की है।

मामले के अनुसार बागेश्वर निवासी प्रमोद कुमार मेहता ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि बागेश्वर नगर क्षेत्र व बागेश्वर तहसील के अंतर्गत उपजिलाधिकारी बागेश्वर द्वारा 9 मार्च 2020 को एक निविदा प्रकाशित की गई थी। जिसके द्वारा स्थानीय नागरिकों/संस्थाओं को सरयु नदी से रेता बजरी उपखनिज के निस्तारण व उठान हेतु खुली नीलामी आमंत्रित की गई थी।

जिसे याचिकाकर्ता ने इस आधार पर चुनौती दी है कि खुली नीलामी के आड़ में जिला प्रशासन माफियाओं को लाभ पहुचाने के लिए बड़ी मशीनों जैसे जेसीबी, पोकलैंड मशीनों के उपयोग की अनुमति देकर पवित्र नदी के स्वरूप को खत्म करने का प्रयास कर रहा है। जबकि अभी तक सरयु नदी में बिना मशीनों के ही मैनुअल चुगान होता आया है। सरयू नदी में रेता, बजरी अधिक मात्रा में जमा नही होता है। उसका चुगान लेबरों के द्वारा ही किया जाता रहा है। निविदा हेतु 19 मार्च 2020 तक आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी तथा खुली नीलामी 20 मार्च 2020 को की जानी थी।

प्रशासन द्वारा 20 मार्च 2020 को खुली नीलामी कर दी
नीलामी को निरस्त करने हेतु स्थानीय लोगों के द्वारा इस संबंध में जिलाधिकारी बागेश्वर को 13 मार्च को संयुक्त प्रत्यावेदन भी दिया जा चुका था, लेकिन कोई कार्यवाही नही होने पर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर करनी पड़ी। सरयु नदी में रेता बजरी की मात्र के बिना आकलन के ही नियम विरुद्ध तरीके से नीलामी की जा रही है, जो कि उत्तराखंड रिवर ट्रेनिंग नीति 2020 के प्रावधानों के विपरीत है।

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