अमेठी: महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर लगा ग्रहण, निर्माण हुआ ठप

अमेठी: महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर लगा ग्रहण, निर्माण हुआ ठप

अमठी। ग्रामीण क्षेत्र में विकास का नया आयाम गढ़ने के लिए संचालित सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर ग्रहण लग गया है। महकमें के जिम्मेदारों की लापरवाही या धन की कमी, कारण कुछ भी हो। परियोजनाओं के पूरा न होने से ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिलाधिकारी अरुण कुमार बार बार बैठक …

अमठी। ग्रामीण क्षेत्र में विकास का नया आयाम गढ़ने के लिए संचालित सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर ग्रहण लग गया है। महकमें के जिम्मेदारों की लापरवाही या धन की कमी, कारण कुछ भी हो। परियोजनाओं के पूरा न होने से ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

जिलाधिकारी अरुण कुमार बार बार बैठक कर अधिकारियों को 50 लाख की लागत से अधिक की परियोजनाओं को जल्द पूर्ण करने का निर्देश देते रहे हैं। उनकी सख्ती का असर भी जिम्मेदार विभागों पर नही पड़ रहा है। सिंहपुर क्षेत्र के जियापुर में सद्भाव मंडप ,इन्हौना में आईटीआई और गंगानगर चौराहे पर 132 केवी विद्युत उपकेंद्र सहित शासन की तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं का काम शुरू हुआ था। इनमें से विद्युत उपकेंद्र का काम लगभग पूर्ण हो चुका है, लेकिन अभी यह केंद्र पूरी तरह तैयार नही है।

वहीं जियापुर में जन विकास कार्यक्रम योजनांतर्गत 2 करोड़ 34 लाख की लागत से 860.41 वर्ग मीटर में बनने वाले सद्भाव मंडप का निर्माण कार्य तकरीबन एक वर्ष से बंद पड़ा है। आलम यह है कि कार्यदायी संस्था   दीवारें खड़ी कर बीच में ही काम छोड़कर भाग खड़ी हुई। वर्ष भर से यह भवन निर्माण पूरा होने की बांट जोह रहा है। कमोबेश यही हाल इन्हौना में 8 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे आईटीआई भवन का भी है। वर्षों से बन रहे इस भवन का निर्माण कार्य भी जिम्मेदार अफसरों की लचर कार्य प्रणाली के चलते सुस्त पड़ा है। कार्य पूरा न होने से यहां तकनीकी शिक्षण कार्य शुरू होने की उम्मीद निकट भविष्य में नही दिख रही है ।

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पीएम ने किया था शिलान्यास

जियापुर में बनने वाले सद्भाव मंडप का शिलान्यास 3 मार्च 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। जनवरी 2020 में जिलाधिकारी ने स्थलीय निरीक्षण कर कार्य की प्रगति पर असंतोष प्रकट किया था। डीएम ने निर्माण कार्य में तेजी लाने का निर्देश भी कार्यदायी संस्था को दिया।आई टी आई का निर्माण भी शीघ्र पूरा करने की बात कही थी। बावजूद इसके लम्बा वक्त गुजरने के बाद भी निर्माण अधूरा पड़ा है।

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