पीलीभीत: पूर्व विधायक अरशद खां आचार संहिता उल्लंघन के दोषी करार, सुनाई सजा

विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए प्रियंका रानी ने सुनाया फैसला, अर्थदंड अदा न करने पर एक माह कारावास

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पीलीभीत, अमृत विचार। 10 साल पुराने विधानसभा चुनाव 2012 के दौरान वाहन से प्रचार सामग्री बरामद होने पर सुनगढ़ी थाने में लिखे गए आचार संहिता उल्लंघन के मुकदमे में पूर्व विधायक अरशद खां दोषी करार दिए गए। विशेष न्यायाधीश एमपी/एमएलए प्रियंका रानी ने सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया। जिसमें पूर्व विधायक अरशद खां को दोषी करार देते हुए दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर एक माह कारावास भुगतना होगा।

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अभियोजन कथानक के अनुसार पांच जनवरी 2012 को थानाध्यक्ष सुनगढ़ी पहुप सिंह द्वारा आचार संहिता पालन कराने को टीम के साथ छतरी चौराहा पर वाहन चेकिंग कर रहे थे। रात करीब 10.10 बजे चेकिंग के दौरान बोलेरो (यूपी 26 एफ 6355) को रोका गया। इस वाहन की तलाशी ली गई तो बसपा प्रत्याशी की प्रचार सामग्री बरामद हुई। जिसमें छह बुकें, 138 गोल स्टीकर, 32 आयताकार स्टीकर, चार पैड व दो स्टीकर जिन पर मुद्रक, प्रकाशक एवं संख्या अंकित नहीं थी।

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बरामद सामग्री आदर्श आचार संहिता विधानसभा चुनाव 2012 का स्पष्ट उल्लंघन माना गया। प्रथम सूचना रिपेार्ट दर्ज कर विवेचना की गई। विवेचना पूरी होने के बाद धारा 127 (क) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में पूर्व विधायक अरशद खां के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। मुकदमे के विचारण के दौरान राज्य सरकार की ओर से छह गवाहों को परीक्षित कराया गया। दोनों पक्षों को सुनने एवं पत्रावली का परिशीलन करने के उपरांत विशेष न्यायाधीश एमपी/एमएलए प्रियंका रानी ने पूर्व विधायक अरशद खां को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 127 (क) का दोषी पाते हुए दो हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।

नहीं मिला परिवीक्षा अधिनियम का लाभ
पूर्व विधायक के अधिवक्ता ने न्यायालय में दंड के प्रश्न पर सुनवाई के दौरान याचना की कि अभियुक्त वृद्ध व्यक्ति है। यह उसका प्रथम अपराध है। उसे कम से कम सजा दी जाए। परिवीक्षा अधिनियम का लाभ प्रदान किया जाए। अभियोजन पक्ष की ओर से अभियुक्त के अधिवक्ता का विरोध करते हुए कथन किया गया कि अभिुयक्त द्वारा आचार संहिता का उल्लंघन किया गया है। अत: अधिक से अधिक दंड दिया जाए। परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देना उचित नहीं है। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुनाया और परिवीक्षा अधिनियम का लाभ प्रदान न करते हुए दो हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।

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