मुरादाबाद : कराह और दर्द की कहानी पर मरहम लेकर लौटी महिलाएं

मुरादाबाद : कराह और दर्द की कहानी पर मरहम लेकर लौटी महिलाएं

आशुतोष मिश्र, अमृत विचार। कटघर की रंजना की समस्या का निदान आश्वासन के हवाले हो गया। तीन तलाक पीड़िता आशिया की दर्दभरी कहानी अभी विराम नहीं पाई है। सीमा देवी की मुसीबत प्रोबेशन विभाग की सुनवाई के बाद आयोग के पास तो आ गयी है, लेकिन इस अबला का पीड़ा का निदान कब होगा, इसका …

आशुतोष मिश्र, अमृत विचार। कटघर की रंजना की समस्या का निदान आश्वासन के हवाले हो गया। तीन तलाक पीड़िता आशिया की दर्दभरी कहानी अभी विराम नहीं पाई है। सीमा देवी की मुसीबत प्रोबेशन विभाग की सुनवाई के बाद आयोग के पास तो आ गयी है, लेकिन इस अबला का पीड़ा का निदान कब होगा, इसका जवाब अभी बाकी है।

बुधवार को सर्किट हाउस सभागार में राज्य महिला आयोग की सदस्य अवनि सिंह की जनसुनवाई में ऐसी 11 महिलाओं ने अपना दुखड़ा सुनाया। कोई पति के उत्पीड़न से सिसक उठी तो कोई कपटपूर्ण तरीके से घर और मकान हथियाने वालों की दास्तान सुनाकर रोने लगी। बात और शिकायतों की सुनवाई की फेहरिस्त आगे बढ़ी तो कई हैरतअंगेज मामले आम हो गए। पुलिस की सुस्ती और जिम्मेदारों की ढिलाई के लिए पीड़िताओं ने जुबान खोल तो पीठ की सदस्य को कहना पड़ा कि जिम्मेदार ऐसे मामलों को गम्भीरता से लें। निर्धारित समय में शिकायतों का निस्तारण हो। कटघर की रंजना की पीड़ा और गुहार के आगे पुलिस बेपर्दा हो गयी।

रंजना का आरोप है कि उसकी मकान के तीन हिस्से खरीदने वाले पूरा घर कब्जा करना चाहते हैं। आशिया की कहानी और दुखदायी है। तलाक की मारी बेचारी की सुनवाई के बाद महिला थाना प्रभारी दीपा चौधरी ने आरोपी की गिरफ्तारी के दो प्रयासों का विवरण रखा। बताया कि इस मामले में मुकदमा दर्ज है।

सदस्य ने घरेलू हिंसा एवं भूमि विवाद के मामलों में कहा कि आयोग का प्रयास रहता है कि पीड़ित महिला की मदद हो एवं उसे न्याय मिले। उधर, जनसुनवाई के पश्चात महिलाओं से संबंधित विभिन्न कल्याणकारी योजना विषयक जागरुकता चौपाल का आयोजन किया गया। योजनाओं में यथा संभव पंजीकरण भी कराया गया। शासन द्वारा संचालित पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, आयुष्मान कार्ड बनाये जाने, कन्या सुमंगला योजना से आच्छादित, बालिकाओं को लाभ दिलाए जाने, बेटी बचाओ-बेटी पढाओ योजना पर आख्या उपलब्ध कराये जाने हेतु संबंधित के निर्देशित किया। सलाह दी गयी कि इच्छुक महिलाएं वादों का लोक अदालत में भी सुलह समझौते के आधार पर निस्तारण करा सकती हैं। इस अवसर पर अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम प्रज्ञा यादव, सलोनी अग्रवाल पुलिस क्षेत्राधिकारी कांठ, जिला प्रोबेशन अधिकारी नरेश चैहान, इंस्पेक्टर महिला थाना दीपा चौधरी, वन स्टाप सेन्टर की काउंसलर शिव कुमार गौतम, आलम जैदी उपस्थित थे।

करीब चार साल के दौरान हमने ऐसे सैकड़ों प्रकरण देखे हैं। मेरे लिए यह कार्य काफी चुनौती भरा रहा। घरेलू महिला के रूप में काम करने के दौरान सरकार की ओर से यह जिम्मेदारी मिली है। मुझे अपने प्रयास पर पूरा संतोष है। घरेलू उत्पीड़न, यौन हिंसा और अन्य तरह के मामलों को समयबद्ध निस्तारण का प्रयास करती हूं। यह भी सच है कि कुछ मामले न्यायालय में होने की वजह से हम उसमें सीधे निर्णय नहीं ले पाते है। महिलाओं में जागरुकता बड़ी है, इसलिए शिकायतें बढ़ी हैं। तलाक और दहेज उत्पीड़न के मामले में प्रभारी कार्रवाई पर हमारा जोर रहता है।-अवनि सिंह, सदस्य राज्य महिला अयोग 

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