बरेली में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की दस्तक, 20 शूकरों की मौत

बरेली में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की दस्तक, 20 शूकरों की मौत

बरेली, अमृत विचार। सहारनपुर व उत्तराखंड में शूकरों की लगातार मौतें हो रही हैं। इस बीच बरेली में भी 20 से अधिक शूकरों की मौत से हड़कंप मच गया। अचानक इतनी बढ़ी संख्या में शूकरों की मौत के बाद भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की ओर से मृत व बीमार शूकरों के नोजल, लार के …

बरेली, अमृत विचार। सहारनपुर व उत्तराखंड में शूकरों की लगातार मौतें हो रही हैं। इस बीच बरेली में भी 20 से अधिक शूकरों की मौत से हड़कंप मच गया। अचानक इतनी बढ़ी संख्या में शूकरों की मौत के बाद भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की ओर से मृत व बीमार शूकरों के नोजल, लार के सैंपल की जांच करने पर अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि हुई है। जिसके बाद आईवीआरआई की ओर से आसपास के इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, शूकर पालकों के बीच दहशत फैल गई है। अभी तक इस बीमारी की कोई वैक्सीन भी नहीं है। इससे बचाव के लिए सतर्कता और सफाई ही एकमात्र उपाय है।

रिठौरा के डांडिया गांव में शूकर फार्म संचालित करने वाले रवि कुमार भारती ने बताया कि उनके फार्म में शूकरों की संख्या करीब 100 है। एक सप्ताह में करीब 20 शूकरों की मौत होने से वे घबरा गए। सतर्कता बरतते हुए उन्होंने आईवीआरआई के वैज्ञानिकों से संपर्क किया। संस्थान की ओर से आई टीम ने मृत शूकर के आंतरिक अंग जैसे लीवर, हृदय, किडनी, फेफड़े, बीमार व स्वस्थ शूकर के लार व नाक के सैंपल लेकर जांच की। जिसमें अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि हुई है।

क्या होता है अफ्रीकन स्वाइन फीवर
आईवीआरआई के वैज्ञानिकों के अनुसार अफ्रीकन स्वाइन फीवर एक वायरल बीमारी है, जिसका असर जंगली और पालतू शूकरों में होता है। इस बीमारी में तेज बुखार के बाद दिमाग की नस फटने की वजह से शूकरों की मौत हो जाती है। यह रोग संपर्क में आने से एक से दूसरे शूकर में फैलता है।अगर किसी संक्रमित शूकरों ने कुछ खाकर छोड़ दिया हो और उसे कोई दूसरा स्वस्थ शूकरों खा ले तो भी ये रोग हो जाता है।

मनुष्यों में नहीं फैलेगा संक्रमण
वैज्ञानिकों के अनुसार अफ्रीकन स्वाइन फ्लू से मनुष्य को किसी तरह का खतरा नहीं है। इस रोग से एक से दूसरा शूकर संक्रमित होता है, लेकिन मनुष्य को घबराने की जरूरत नहीं है। इस दौरान संक्रमित शूकर के मांस खाने से बचना चाहिए।

वायरस के संक्रमण से गहरे काले रंग के हो गए आंतरिक अंग
जांच के लिए आईवीआरआई के वैज्ञानिकों की ओर से जब मृत शूकरों के आंतरिक अंगों के सैंपल लिए गए तो उन्होंने देखा कि हृदय, किडनी, फेफड़े, श्वासनली संक्रमण के चलते गहरे काले रंग के हो गए थे। आमतौर पर शूकर के आंतरिक अंगों का रंग लाल होता है। लेकिन वायरस ने शूकरों के आंतरिक अंगों को पूरी तरह खराब कर दिया।

बीमार शूकरों को करना होगा आइसोलेट
वैज्ञानिकों के अनुसार उचित वैक्सीन न होने के चलते बीमार शूकरों को स्वस्थ शूकरों के बाड़े से आइसोलेट किया जाएगा। जिससे स्वस्थ शूकरों में इस बीमारी का फैलाव न हो सके। वहीं, मृत शूकरों को फार्म से दूर ले जाकर जमीन में दफना दिया जाएगा। साथ ही दफनाने के स्थान पर नमक व चूने के घोल का छिड़काव करना आवश्यक रहेगा।

वैज्ञानिक खोज रहे मोड ऑफ ट्रांसमिशन
अफ्रीकन स्वाइन फीवर बीमारी सॉफ्ट टीक नामक कीड़े से फैलती है। सामान्यत यह कीड़े अफ्रीका महाद्वीप पर पाए जाते हैं। भारत में ये कीड़े नहीं पाए जाते हैं। बावजूद इसके बीमारी के फैलने के क्या कारण हैं, इसके लिए वैज्ञानिक शोध करेंगे।

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