बरेली: रेपो रेट से किस्त महंगी होने से 4 लाख ऋणधारकों की जेब पर पड़ेगा असर

बरेली,अमृत विचार। पेट्रोल-डीजल समेत दैनिक वस्तुएं महंगी होने से पहले ही घर-गृहस्थी चलाना आम लोगों के लिए मुश्किल हो रहा था। अब बैंकों की रेपो रेट में बढ़ोतरी से घर बनवाना, वाहन खरीदना व कारोबार करना भी महंगा हो गया है। रेपो रेट बढ़ने से बैंकों से कर्ज लेना भी जेब पर अतिरिक्त बोझ डालेगा। …
बरेली,अमृत विचार। पेट्रोल-डीजल समेत दैनिक वस्तुएं महंगी होने से पहले ही घर-गृहस्थी चलाना आम लोगों के लिए मुश्किल हो रहा था। अब बैंकों की रेपो रेट में बढ़ोतरी से घर बनवाना, वाहन खरीदना व कारोबार करना भी महंगा हो गया है। रेपो रेट बढ़ने से बैंकों से कर्ज लेना भी जेब पर अतिरिक्त बोझ डालेगा। पहले से कर्ज लिए बैठे जिले के करीब 4 लाख से अधिक लोगों पर ईएमआई का बोझ बढ़ेगा। इसे लेकर लोन धारकों के पास बैंकों के मैसेज भी पहुंचने लगे हैं, इससे लोगों की चिंता बढ़ गई है।
भारतीय रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआई) ने बैंकों को दिए जाने वाले कर्ज की ब्याज दर (रेपो रेट) में 4.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इससे बैंकों को मिलने वाला कर्ज महंगा हो गया। ऐसे में बैंकों से व्यापार, घर, कार और पर्सनल लोन लेना आम लोगों की जेब पर भारी पड़ेगा। कई लोगों का कहना है कि इस महंगाई में पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ने से मालभाड़े में जिस हिसाब से वृद्धि हुई है, उससे पहले ही दाल, सब्जी, मेवा, दूध-घी महंगा हो चुका है। 2021 दिसंबर के मुकाबले 2022 मार्च-अप्रैल तक महीने के खर्च में करीब एक से डेढ़ हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। ऐसे में बैंकों का कर्ज महंगा होने से मध्यम वर्गीय परिवारों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।
क्या होता है रेपो रेट
विशेषज्ञों के अनुसार रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक ग्राहक बैंकों को लोन देता है। इस पैसे से बैंक अपने ग्राहकों को लोन देते हैं। रेपो रेट कम होने का मतलब है कि ग्राहक कम ब्याज दर पर बैंक से लोन ले सकेंगे और रेपो रेट बढ़ने से कर्ज महंगा होगा।
जिले में करीब 4 लाख से अधिक ऋण धारक हैं। इनमें केसीसी के भी हैं। फिलहाल लोन महंगा होने के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से सभी बैंकों के मुख्यालय में सर्कुलर पहुंच गया है।—एमएम प्रसाद , एलडीएम
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