बरेली: सूफी परंपरा ने हिंदुस्तान को एक सूत्र में पिरोया है

बरेली, अमृत विचार। बुधवार को दरगाह शाहदाना वली के कुल की रस्म अदा की गई। कुल की रस्म से पहले ही शाहदाना स्थित रेलवे ग्राउंड पर अकीदतमंदों का सैलाब उमड़ पड़ा। भारी संख्या में लोग उर्स स्थल पर जमा हुए और कुल के बाद दुआ-ए-खैर की गई। इससे पहले दरगाह पर दिन भर चादरपोशी और …
बरेली, अमृत विचार। बुधवार को दरगाह शाहदाना वली के कुल की रस्म अदा की गई। कुल की रस्म से पहले ही शाहदाना स्थित रेलवे ग्राउंड पर अकीदतमंदों का सैलाब उमड़ पड़ा। भारी संख्या में लोग उर्स स्थल पर जमा हुए और कुल के बाद दुआ-ए-खैर की गई। इससे पहले दरगाह पर दिन भर चादरपोशी और गुलपोशी का सिलसिला चलता रहा और फनकारों ने अपने कलाम पेश किए।
उर्स की तकरीबात फजर की नमाज के बाद तिलावते कुरान से शुरू हुईं। सलातो सलाम का नजराना रसूले पाक की शान में पेश किया गया। दूर दराज से आए अकीदतमंदों ने दरगाह पर चादर और गुलपोशी की। जोहर की नमाज के बाद खानखाहे नियाजिया से आए पाशा मियां निजामी ने चादर और फूल पेश कर इत्र की बरसात की। इस दौरान मुतवल्ली अब्दुल वाजिद खां ने कहा कि हिंदुस्तान सूफी संतों की सरजमीन है, सूफी परंपरा ने हिंदुस्तान को एक सूत्र में पिरोने का काम किया है।
ख्वाजा गरीब नवाज, वारिस पाक, शाहदाना वली सरकार आदि खानकाहों से यह काम आज भी जारी है। खानकाहों और दरगाहों पर सभी धर्मों के लोग अकीदत के साथ आते हैं जो कौमी एकता की एक मिसाल है। असर की नमाज के बाद कुल शरीफ की रस्म से पहले कलियर के फनकार निजाम साबरी और उनके साथियों ने बुजुर्गों की शान में अपने कलाम पेश किए और रंग पढ़ा गया। खानकाहे तहसीनिया के सज्जादानशीन मौलाना हस्सान रजा खां ने कुल फतिहा पढ़ी।
जानशीने तहसीन-ए-मिलत सूफी रिजवान रजा खां ने हिंदुस्तान की सलामती, खुशहाली और बीमारों को शिफा के लिए दुआ की। मगरिब के बाद उलेमा-ए-इकराम ने दरगाह पर नातो मनकबत का नजराना पेश किया। ईशा बाद महफिले समा सजाई गई। उर्स की व्यवस्था देखने वालों में युसूफ इब्राहिम, हाजी अबरार खां, इरफान रजा, सलीम रजा, खलील कादरी, आफताब खां, अब्दुल सलाम नूरी, भूरा साबरी, जर्दब साबरी, राजू शमीम, जफर अली, गफूर पहलवान आदि मौजूद रहे। दरगाह शाहदाना वली के मीडिया प्रभारी वसी अहमद वारसी ने बताया की गुरुवार को शाम 4:30 बजे हजरत केले शाह बाबा के कुल की रस्म अदा की जाएगी रात को 9:00 बजे से महफिले समा का आयोजन होगा।
फजीहत के बाद भी मंच से नहीं उतरे सपा नेता
शाहदाना स्थित रेलवे ग्राउंड पर उर्स का मंच सजा था तो दूसरी तरफ सपा के कुछ नेता भी उर्स में शामिल होने पहुंचे लेकिन हद तो तब हो गई जब नेता सपा की टोपी लगाकर मंच पर चढ़ गए। इसके बाद उलेमा को मंच से कई बार ऐलान करना पड़ा कि राजनीतिक लोग कृपया मंच पर न चढ़ें। फिर क्या था चिकित्सक और सपा नेता डा. अनीस बेग मंच से तो नहीं उतरे लेकिन उन्होनें अपनी सपाईयों वाली लाल टोपी रुमाल से ढक ली। इसके अलावा सपा महानगर अध्यक्ष शमीम खान सुल्तानी भी कुल में शिरकत करने पहुंचे थे।